Admin / Thu, Feb 26, 2026 / Post views : 39
तेल अवीव: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को इजरायली संसद को संबोधित किया है। इसपर दुनियाभर के एक्सपर्ट्स की प्रतिक्रिया आ रही है। इसके अलग अलग जियो-पॉलिटिकल मतलब निकाले जा रहे हैं। इजरायली अखबार जेरूशलम पोस्ट में एनालिस्ट हर्ब कीनन ने लिखा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में अपने भाषण का अंत "अम यिसराइल चाई" शब्दों के साथ किया जो शायद अजीब न लगा हो। क्योंकि एक विदेशी नेता मेजबानों को खुश करने के लिए उनकी मातृभाषा में कुछ शब्द अकसर बोलते हैं, लेकिन मोदी ने जो कहा है उसका ऐतिहासिक असर होगा। क्योंकि महात्मा गांधी से लेकर जवाहरलाल नेहरू तक जायोनिज्म के खिलाफ थे और उन्होंने भारत को कई वर्षों तक इजरायल से दूर रखा।
लेकिन आज दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाले देश का नेता देश की संसद में खड़ा था और अपने देश को बनाने वाले नेताओं की सोच से अलग हटकर ऐलान कर रहा था कि "इजरायल के लिए लोग जिंदा हैं।" इसीलिए मोदी ने नेसेज में जो कहा है उसके मायने काफी अलग हैं। मोदी ने सिंधु घाटी और जॉर्डन घाटी का जिक्र किया। उन्होंने टिक्कुन ओलम के बारे में बात की, जो दुनिया को ठीक करने के लिए हिब्रू शब्द है और वसुधैव कुटुम्बकम की बात कही जिसका मतलब है "पूरी दुनिया एक परिवार है।" उन्होंने हनुक्का और पुरीम को दिवाली और होली जैसे हिंदू त्योहारों के साथ रखा।
'मोदी की बातों में दो सभ्यताओं का मेल था'
इजरायली अखबार में लिखते हुए हर्ब कीनन ने लिखा है कि मोदी ने जो कहा था वो व्यापार नहीं था बल्कि यह दो पुरानी सभ्यताओं का मेल था। लेकिन उनके भाषण का सबसे अहम हिस्सा सभ्यता के जिक्र में नहीं बल्कि नैतिक साफगोई में था। मोदी ने कहा कि "मैं भारत के लोगों की गहरी संवेदनाएं अपने साथ रखता हूं। हर उस जान के लिए जो गई, और हर उस परिवार के लिए जिनकी दुनिया 7 अक्टूबर को हमास के बेरहम आतंकवादी हमले में तबाह हो गई।" मोदी ने कहा कि "भारत इस समय और आगे भी इजरायल के साथ मजबूती से पूरे यकीन के साथ खड़ा है।"
'मोदी ने हमास आतंकवाद पर गोलमोल बात करने से मना कर दिया'
इजरायली अखबार में एनालिस्ट हर्ब कीनन ने लिखा है कि प्रधानमंत्री मोदी की हमास के हमले को लेकर दिए गये बयान काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने लिखा है कि मोदी ने हमास के आतंक पर गोलमोल बात करने से मना कर दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि "कोई भी वजह आम लोगों की हत्या को सही नहीं ठहरा सकती। कोई भी चीज आतंकवाद को सही नहीं ठहरा सकती।" जेरूशलम पोस्ट ने लिखा है कि "कोई गोलमोल बात नहीं। कोई कॉन्टेक्स्ट नहीं। कोई एक तरफ नहीं और बुराई को कम करने के लिए कोई "बैलेंसिंग" नहीं। इजरायली अखबार ने लिखा है कि 2017 के भाषण में मोदी ने एक बार फिर फिलीस्तीन का जिक्र नहीं किया था। और इस बार सिर्फ एक बार फिलीस्तीन का नाम लिया वो भी सिर्फ 'गाजा बोर्ड ऑफ पीस' को लेकर।
'सहनशीलता से संसद की अफरातफरी को संभाला'
उन्होंने लिखा है पीएम मोदी के भाषण से पहले संसद में थोड़ी अफरातफरी थी। फिर भी उसने मोदी को परेशान नहीं किया। संसद के स्पीकर आमिर ओहाना की शुरुआती भाषण के दौरान विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया। विपक्ष सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष यित्ज़ाक अमित को इस खास संसदीय सत्र में न बुलाने का फैसले खिलाफ वॉकऑउट किया था। चैंबर को आधा खाली दिखाने से रोकने के लिए पुराने MKs को अंदर बुलाया गया। जैसे ही विपक्षी सांसद चले गए उस वक्त जो सांसद बचे थे उन्होंने उस पल की शर्मिंदगी को कम करने की कोशिश में खड़े हो गए और “मोदी, मोदी” के नारे लगाए।
स्पीकर ओहाना और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बोलने के बाद मोदी के भाषण देने से पहले विपक्षी सांसद वापस अपनी सीटों पर लौट आए और म्यूजिकल चेयर्स का यह एपिसोड पूरा किया। फिर भी मोदी ने इसे शालीनता से संभाला। उन्होंने विपक्षी नेता यायर लैपिड का सम्मान से स्वागत किया, भले ही लैपिड विरोध के केंद्र में थे। उन्होंने नेसेट को पूरी तरह से गठबंधन और विपक्ष दोनों को, एक साथी लोकतंत्र की प्रतिनिधि संस्था के रूप में माना। हर्ब कीनन ने लिखा है कि मोदी के लिए लगातार बजती तालियां और उनके नाम पर लगने वाले नारे इस बात का एक बड़ा संकेत था कि यह रिश्ता कितना आगे बढ़ चुका है, खासकर जब से वह 12 साल पहले वो भारत के प्रधानमंत्री बने थे।
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