Rashtriya Seva Johar / Mon, Aug 17, 2026 / Post views : 1
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि मृत सरकारी कर्मचारी के एक से अधिक बच्चे नियुक्ति के लिए पात्र हैं, तो उम्र और वरिष्ठता के आधार पर बड़े बच्चे के दावे पर पहले विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, केवल उम्र में बड़ा होना नियुक्ति का स्वतः अधिकार नहीं देता, बल्कि संबंधित अभ्यर्थी को निर्धारित सभी पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी।
मामला मुंगेली जिले के एक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में चपरासी के पद पर कार्यरत रहे ईश्वर सिंह क्षत्रिय से जुड़ा है। उनका 29 सितंबर 2016 को सेवा के दौरान निधन हुआ था। उनके दो विवाह हुए थे और दोनों से जन्मे बेटों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था।
जिला शिक्षा अधिकारी, मुंगेली ने 7 अगस्त 2019 को छोटे बेटे राजकुमार को अनुकंपा नियुक्ति दे दी थी। इस निर्णय को बड़े बेटे जितेंद्र सिंह क्षत्रिय ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जब एक ही श्रेणी में एक से अधिक संतान अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र हों, तो उम्र में बड़े बच्चे के दावे को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाना चाहिए।
कोर्ट ने छोटे बेटे को दी गई नियुक्ति का आदेश रद्द कर मामले को फिर से जिला शिक्षा अधिकारी के पास भेज दिया। साथ ही बड़े बेटे की पात्रता की जांच कर 30 दिनों के भीतर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया।
फैसले में यह पहलू भी महत्वपूर्ण है कि सरकारी कर्मचारी की दूसरी शादी से जन्मा बेटा भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र हो सकता है। यानी केवल यह तथ्य कि वह दूसरी पत्नी की संतान है, उसे स्वतः अनुकंपा नियुक्ति से बाहर करने का आधार नहीं बन सकता।
रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ शादीशुदा होना किसी आश्रित संतान को अनुकंपा नियुक्ति से स्वतः वंचित करने का आधार नहीं हो सकता, यदि वह अन्य निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करती है।
इस फैसले से उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण दिशा सामने आई है, जहां मृत सरकारी कर्मचारी के एक से अधिक बच्चे अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र होते हैं। ऐसे मामलों में विभाग को नियुक्ति देते समय केवल अपनी सुविधा के आधार पर किसी एक संतान को चुनने के बजाय पात्रता और वरिष्ठता के आधार पर बड़े बच्चे के दावे पर पहले विचार करना होगा।
हालांकि, बड़े बच्चे की वरिष्ठता अपने आप में नियुक्ति की गारंटी नहीं है। उसे अनुकंपा नियुक्ति के लिए लागू सभी नियमों और पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा।
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