RESHAM SAHU / Sun, Aug 16, 2026 / Post views : 9
नई दिल्ली। संसद में ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 को लेकर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने न्यायिक संस्थाओं में SC, ST और OBC के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया। उन्होंने ट्रिब्यूनल और NCLT जैसी संस्थाओं में सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग रखी।
इसी राजनीतिक बहस के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर से जुड़ा पुराना बयान भी चर्चा में है। रिजिजू ने दिसंबर 2024 में कहा था कि वह अंबेडकर के बाद देश के पहले बौद्ध कानून मंत्री हैं और 71 साल बाद उन्हें यह जिम्मेदारी मिली।
रिजिजू ने उस समय अंबेडकर की विरासत को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अंबेडकर की कुर्सी पर बैठने का अवसर दिया। हालांकि, यह बयान 2024 का है, इसलिए इसे 2026 में दिए गए नए बयान के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
वहीं, 2026 के ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक का उद्देश्य विभिन्न ट्रिब्यूनलों में नियुक्ति प्रक्रिया और सेवा शर्तों में एकरूपता लाना तथा व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने से जुड़ा है। विधेयक में प्रस्तावित National Tribunals Commission को लेकर भी चर्चा हुई है।
राजनीतिक तौर पर तस्वीर यह है कि एक तरफ ट्रिब्यूनलों में सामाजिक प्रतिनिधित्व का सवाल उठ रहा है, तो दूसरी तरफ रिजिजू का अंबेडकर के बाद पहले बौद्ध कानून मंत्री होने वाला बयान एक बार फिर बहस का हिस्सा बन गया है।
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