Simran Mallick / Tue, Oct 6, 2026 / Post views : 17
बिलासपुर। दीपावली से पहले शहर में पटाखा कारोबार तेज हो गया है। अस्थायी लाइसेंस के लिए अब तक करीब 300 आवेदन मिलने की जानकारी है। आवेदकों से नगर निगम का शपथ पत्र, पुलिस सत्यापन और 600 रुपए का चालान लिया जा रहा है। शहर के भीतर दुकानों का नवीनीकरण एडीएम कार्यालय और आसपास के क्षेत्रों का संबंधित एसडीएम कार्यालय से होगा।
इसी बीच शहर में वर्षों पुराने स्थायी पटाखा लाइसेंसों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासनिक फोल्डर के अनुसार कुछ लाइसेंस करीब 50 साल पुराने बताए जाते हैं। जिस समय ये लाइसेंस जारी हुए थे, तब संबंधित इलाकों में आबादी और निर्माण काफी कम था। आज उन्हीं जगहों के आसपास घनी बसाहट, बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान विकसित हो चुके हैं।
सवाल है कि क्या इन पुराने लाइसेंसधारकों के परिसरों का वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार दोबारा भौतिक निरीक्षण किया गया है? यदि आसपास की आबादी और भू-उपयोग बदल गया है तो सुरक्षा मानकों की समीक्षा किस स्तर पर हुई?
पुलिस सत्यापन भी सवालों में
अस्थायी लाइसेंस के लिए पुलिस सत्यापन में यदि केवल आवेदक के खिलाफ अपराध दर्ज नहीं होने की पुष्टि की जाती है, तो यह सवाल भी उठता है कि दुकान, भंडारण स्थल और व्यवसाय की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कौन करता है?
पटाखों के वास्तविक स्टॉक, प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री और बिक्री के बाद बचे स्टॉक के भंडारण की निगरानी को लेकर भी स्पष्टता जरूरी है।
नगर निगम, प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन और पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारियां तय हैं, लेकिन क्या इन विभागों का संयुक्त निरीक्षण हो रहा है, यह भी बड़ा सवाल है।
शहर तेजी से बढ़ा है और कई पुराने लाइसेंसों के आसपास अब घनी आबादी है। ऐसे में जनता का सवाल सीधा है—क्या प्रशासन किसी हादसे के बाद कार्रवाई करेगा या उससे पहले पुराने लाइसेंसों और वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेगा?
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