Simran Mallick / Tue, Oct 6, 2026 / Post views : 17
नई दिल्ली: मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस जियो के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर निवेशकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक Jio IPO 21 अक्टूबर 2026 को खुल सकता है। प्रस्तावित आईपीओ का आकार करीब 37,700 करोड़ रुपये यानी लगभग 4 अरब डॉलर बताया जा रहा है। अगर यह इश्यू इसी आकार में आता है, तो भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है।
हालांकि, कंपनी की ओर से अभी तक आईपीओ की तारीख, प्राइस बैंड और इश्यू साइज को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जियो आईपीओ का संभावित प्राइस बैंड 1,150 रुपये से 1,220 रुपये प्रति शेयर के बीच हो सकता है। एंकर निवेशकों के लिए 19 अक्टूबर को बोली प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
अगर आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलता है, तो निवेशकों के लिए 23 अक्टूबर तक बोली लगाने का मौका मिल सकता है। संभावित शेड्यूल के मुताबिक अलॉटमेंट 26 अक्टूबर और शेयर बाजार में लिस्टिंग 28 अक्टूबर को हो सकती है। कंपनी 12 अक्टूबर के बाद रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर सकती है।
जियो आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट में भी हलचल देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, Jio IPO GMP करीब 156 रुपये प्रति शेयर तक पहुंच गया है, जबकि इससे पहले यह करीब 148 रुपये बताया गया था।
कंपनी की ओर से यूके और अमेरिका सहित कुछ देशों में रोड शो भी किए गए हैं। इन रोड शो में आकाश अंबानी और ईशा अंबानी की भागीदारी रही है।
हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि ग्रे मार्केट प्रीमियम आधिकारिक लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं होता और GMP में बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदलाव हो सकता है।
जियो आईपीओ से जुड़ी खबरों के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। सोमवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर बीएसई पर 1.72 फीसदी की तेजी के साथ 1,186.10 रुपये पर बंद हुआ।
करीब 37,700 करोड़ रुपये का जियो आईपीओ आने पर यह हाल के वर्षों के सबसे बड़े भारतीय आईपीओ में शामिल हो सकता है। इससे पहले हुंडई मोटर इंडिया का करीब 27,850 करोड़ रुपये का आईपीओ आया था।
जियो आईपीओ की तारीख, प्राइस बैंड और इश्यू साइज से जुड़ी जानकारी फिलहाल रिपोर्ट्स पर आधारित है। जब तक कंपनी या संबंधित नियामकीय दस्तावेजों से आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, तब तक संभावित तारीखों को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए।
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