Simran Mallick / Fri, Aug 7, 2026 / Post views : 3
रायपुर। छत्तीसगढ़ में घुमंतू और निराश्रित मवेशियों के संरक्षण तथा उन्हें सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार की गौधाम योजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। योजना के तहत प्रदेशभर में 1460 गौधाम स्थापित करने की परिकल्पना की गई है।
हर विकासखंड में उत्कृष्ट गौठानों को गौधाम के रूप में विकसित करने की तैयारी
योजना के तहत प्रत्येक विकासखंड में उत्कृष्ट गौठानों का चयन कर उन्हें गौधाम के रूप में विकसित करने की योजना है। प्राथमिकता ऐसे गौठानों को दी जा रही है, जहां जरूरी अधोसंरचना उपलब्ध है और जो राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास स्थित हैं। इसका उद्देश्य सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना और सड़क दुर्घटनाओं जैसी समस्याओं को कम करना भी है।
408 आवेदनों में 151 को प्रशासनिक स्वीकृति
प्राप्त जानकारी के अनुसार गौधाम योजना के तहत अब तक 408 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 151 आवेदनों को प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है, जबकि 88 गौधामों का पंजीयन पूरा हो चुका है। वर्तमान में संचालित 42 गौधामों में करीब 5,109 निराश्रित पशुओं को संरक्षण दिया जा रहा है।
पंचायतों और संस्थाओं की भी होगी भूमिका
गौधामों के संचालन में ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता देने के साथ शहरी गौठानों को भी योजना में शामिल किया गया है। इसके अलावा स्वयंसेवी संस्थाओं, पंजीकृत गौशालाओं, एनजीओ, एफपीओ और ट्रस्ट के माध्यम से भी गौधाम संचालन की व्यवस्था की जा सकती है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुधन संरक्षण पर जोर
गौधाम योजना का उद्देश्य केवल बेसहारा पशुओं को आश्रय देना नहीं, बल्कि गौ-संरक्षण, पशुधन की देखभाल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है। योजना के विस्तार से सड़कों पर आवारा मवेशियों की समस्या से राहत मिलने और पशुधन के बेहतर संरक्षण की उम्मीद है।
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