Simran Mallick / Mon, Oct 5, 2026 / Post views : 1
बिलासपुर। एकतरफा तलाक के मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी पक्ष को सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना उसके खिलाफ आदेश पारित नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट द्वारा तलाक की कार्यवाही में अपनाई गई प्रक्रिया को उचित नहीं माना और संबंधित आदेश को रद्द कर दिया।
जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि एकतरफा फैसला सुनाने से पहले संबंधित पक्ष को नोटिस देने की निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि अखबार में नोटिस प्रकाशित करना अंतिम उपाय है। इससे पहले सामान्य तरीके से नोटिस देने और जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति के घर पर नोटिस चस्पा करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
एक बार नोटिस लौटने पर सीधे अखबार में प्रकाशन
मामला सूरजपुर निवासी महिला से जुड़ा है। महिला के पति ने 9 जनवरी 2024 को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी। फैमिली कोर्ट ने पत्नी के दिए पते पर पंजीकृत डाक से नोटिस भेजा, लेकिन पता सही नहीं होने के कारण नोटिस वापस लौट आया।
इसके बाद पति ने अखबार में नोटिस प्रकाशित कराने की मांग की, जिसे फैमिली कोर्ट ने मंजूरी दे दी। 29 फरवरी 2024 को स्थानीय अखबार में नोटिस प्रकाशित किया गया। हाई कोर्ट ने पाया कि एक बार नोटिस वापस आने के बाद ही अखबार में प्रकाशन का आदेश दे दिया गया, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत अन्य प्रयास किए जाने चाहिए थे।
अखबार में नोटिस अंतिम विकल्प
हाई कोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5 के नियम 17 और 20 का उल्लेख करते हुए कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रयास नहीं दिखता कि पत्नी के घर पर नोटिस चस्पा कराया गया हो। इसके बावजूद यह मान लिया गया कि पत्नी जानबूझकर नोटिस से बच रही है।
पत्नी के अनुसार उसे तलाक की कार्यवाही की जानकारी नहीं थी। उसे 18 नवंबर 2024 को औरंगाबाद में चल रहे भरण-पोषण के मामले की काउंसलिंग के दौरान तलाक की डिक्री की जानकारी मिली। इसके बाद उसने प्रमाणित प्रति प्राप्त की और 2 दिसंबर 2024 को एकतरफा तलाक की डिक्री रद्द करने के लिए आवेदन किया।
फैमिली कोर्ट को नए सिरे से करना होगा फैसला
पत्नी के कोर्ट में उपस्थित नहीं होने पर 25 अप्रैल 2024 को एकतरफा तलाक की डिक्री पारित की गई थी। हाई कोर्ट ने पत्नी की देरी माफ करने की अर्जी स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट के 23 जून 2025 के आदेश को रद्द कर दिया।
अब एकतरफा तलाक की डिक्री रद्द करने के लिए पत्नी द्वारा दायर आवेदन पर फैमिली कोर्ट नए सिरे से फैसला करेगा। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को 12 अक्टूबर को फैमिली कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश भी दिया है।
Tags :
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन