RESHAM SAHU / Mon, Jul 6, 2026 / Post views : 32
रायपुर।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के माना स्थित वृद्ध आश्रम की तस्वीर बेहद चिंताजनक नजर आती है। जिस आश्रम में बेसहारा और असहाय बुजुर्गों को सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए, वहां उन्हें जर्जर भवन, गंदगी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन बिताना पड़ रहा है।
स्थानीय निरीक्षण के दौरान आश्रम की स्थिति दयनीय दिखाई दी। भवन कई जगह से जर्जर है। बरसात का मौसम शुरू होने वाला है और आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को डर है कि कहीं यह कमजोर भवन किसी बड़े हादसे का कारण न बन जाए। उनका कहना है कि वर्षों से नए भवन की मांग होती रही, फाइलें चलती रहीं, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं निकला।
आश्रम में रहने वाले कई बुजुर्गों ने बताया कि उन्हें स्वच्छ पेयजल तक उपलब्ध नहीं हो पाता। साफ-सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। कई बुजुर्ग चलने-फिरने में असमर्थ हैं, फिर भी उन्हें अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
बुजुर्गों ने आरोप लगाया कि यदि वे आश्रम की बदहाल स्थिति या जर्जर भवन के बारे में मीडिया के सामने अपनी बात रखते हैं, तो बाद में उन्हें डांटा-फटकारा जाता है। कुछ बुजुर्गों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है और कभी-कभी मारपीट तक की जाती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
एक बुजुर्ग ने भावुक होकर कहा, "हम अनाथ हैं, हमारी सुनने वाला कोई नहीं है। हम ठीक से चल भी नहीं पाते। अगर बीमारी या लाचारी में कहीं गंदगी हो जाए तो हमें डांट पड़ती है। आखिर अपनी पीड़ा किससे कहें?"
बुजुर्गों का यह भी आरोप है कि आश्रम की सुरक्षा और देखभाल के लिए जिन कर्मचारियों की तैनाती की गई है, वे कई बार अपनी ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहते। शिकायत करने पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, बल्कि शिकायत करने वालों को ही परेशान किए जाने का डर रहता है।
समाज कल्याण विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि अधिकारियों को आश्रम की स्थिति की जानकारी है, तो अब तक वैकल्पिक व्यवस्था या नए भवन का निर्माण क्यों नहीं किया गया? क्या विभाग केवल पत्राचार तक सीमित है, जबकि बुजुर्ग रोज भय और असुविधा के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? यदि जर्जर भवन गिरता है या किसी बुजुर्ग की जान जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
अब निगाहें सरकार, समाज कल्याण विभाग और संबंधित जनप्रतिनिधियों पर हैं कि वे इस मामले में कब तक ठोस कदम उठाते हैं और इन बेसहारा बुजुर्गों को सम्मानजनक एवं सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराते हैं।
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वृद्ध आश्रम रायपुर
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