Simran Mallick / Wed, Sep 30, 2026 / Post views : 1
Pitru Paksha Pitra Dosh Upay: हिंदू धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और स्मरण का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान लोग पितरों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष में किए गए इन कर्मों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
साल 2026 में पितृपक्ष की अवधि 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक है। इस दौरान पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।
क्या होता है पितृ दोष?
ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष को कुंडली से जुड़ी एक स्थिति माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में सूर्य, राहु, केतु और अन्य ग्रहों की कुछ विशेष स्थितियों को इससे जोड़ा जाता है। मान्यता है कि पितृ दोष का प्रभाव परिवार, विवाह, संतान, करियर और आर्थिक जीवन से जुड़ी परेशानियों के रूप में दिखाई दे सकता है।
हालांकि, ये धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं।
भगवान शिव की पूजा
पितृपक्ष में भगवान शिव की आराधना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार, शिव पूजा के माध्यम से पितरों की शांति और परिवार के कल्याण की कामना की जाती है।
इसके लिए सुबह स्नान के बाद शिवलिंग पर जल अर्पित कर भगवान शिव का ध्यान किया जा सकता है। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप भी धार्मिक परंपरा में शुभ माना गया है।
भगवान विष्णु और सूर्य देव की आराधना
पितृपक्ष के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करने की भी परंपरा है। पूजा में तुलसी दल अर्पित करने और पितरों के लिए तर्पण करने की धार्मिक मान्यता है।
वहीं, ज्योतिष में सूर्य को पिता और पूर्वजों का कारक माना जाता है। इसलिए पितृपक्ष में सुबह सूर्योदय के समय तांबे के पात्र से सूर्य देव को जल अर्पित करने की परंपरा है।
भगवान गणेश का स्मरण
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है और हिंदू परंपरा में शुभ कार्यों से पहले उनकी पूजा की जाती है। पितृपक्ष के दौरान भी गणेश जी का स्मरण कर परिवार की बाधाएं दूर होने और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के साथ इन देवताओं की पूजा पितरों की शांति और परिवार के कल्याण की कामना के लिए की जाती है।
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