Simran Mallick / Wed, Sep 30, 2026 / Post views : 3
नई दिल्ली: मां दुर्गा की आराधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि इस साल 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू होगा। पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे से 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से मानी जाएगी।
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना यानी कलश स्थापना की जाती है। इसी दौरान मिट्टी के पात्र में जौ बोने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यताओं में जौ के अंकुरों को शुभता, समृद्धि और आने वाले समय से जोड़कर देखा जाता है।
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का शुभ समय सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा।
मुहूर्त स्थान और पंचांग के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए पूजा के लिए स्थानीय पंचांग या विद्वान की सलाह लेना उचित माना जाता है।
सनातन परंपरा में मिट्टी को प्रकृति और पृथ्वी तत्व से जोड़कर देखा जाता है। इसी कारण घटस्थापना के दौरान मिट्टी के पात्र का उपयोग करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मिट्टी जीवन और सृजन का प्रतीक मानी जाती है।
जौ को भी नवरात्रि की पूजा में विशेष महत्व दिया गया है। पारंपरिक मान्यताओं में इसे आदि अन्न या पहली फसल से जोड़ा जाता है। इसी वजह से शुभ कार्यों, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों में जौ के उपयोग की परंपरा रही है।
नवरात्रि में जौ बोना घर में अन्न, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में नवरात्रि के दौरान उगने वाले जौ के रंग और वृद्धि को शुभ-अशुभ संकेतों से जोड़ा जाता है। हालांकि, इन मान्यताओं का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है और इन्हें धार्मिक परंपरा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मान्यता है कि यदि नवरात्रि के दौरान जौ तेजी से बढ़ें और उनका रंग हरा एवं स्वस्थ दिखाई दे, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। इसे घर में सुख-समृद्धि, उन्नति और खुशहाली आने की धार्मिक मान्यता से जोड़ा जाता है।
यदि जौ का अंकुरण कमजोर हो, वृद्धि धीमी हो या जौ पीले और मुरझाए दिखाई दें, तो ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे आने वाले समय में अधिक मेहनत और सावधानी की जरूरत का संकेत माना जाता है।
हालांकि जौ के रंग और वृद्धि पर मिट्टी, पानी, तापमान, रोशनी और बीज की गुणवत्ता जैसे प्राकृतिक कारकों का भी प्रभाव पड़ता है। इसलिए इन्हें भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता।
शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। घटस्थापना के साथ बोए गए जौ दशमी तक बढ़ते हैं और विजयादशमी के दिन इन्हें श्रद्धापूर्वक विसर्जित या पूजा में उपयोग करने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है।
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