नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय धरोहर, धार्मिक परंपराओं और आधुनिक सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने वाले 16 स्मृति-चिह्नों की ई-नीलामी जारी है। इस संग्रह में पारंपरिक डोकरा कला से लेकर महतारी वंदन योजना और नया रायपुर की संस्थाओं से जुड़े स्मृति-चिह्न शामिल किए गए हैं।
संग्रह का प्रमुख आकर्षण डोकरा कला है। यह पारंपरिक लॉस्ट-वैक्स धातु ढलाई तकनीक पर आधारित प्राचीन कला है, जिसकी भारत में हजारों वर्षों पुरानी परंपरा रही है। संग्रह में हाथी-मुख नंदी, खड़े नंदी और माडिया-माडिन जनजातीय युगल जैसी डोकरा कृतियां शामिल हैं।
इसके अलावा जनजातीय संस्कृति को दर्शाने वाला पारंपरिक समारोहिक सिर परिधान भी संग्रह का हिस्सा है। इसे मोर पंख, कौड़ियों, धातु की डिस्क और पीतल की घंटियों से सजाया गया है।
स्मृति-चिह्नों के संग्रह में छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता की झलक भी देखने को मिलती है। रामनामी समाज का जप-अंगवस्त्र, जिस पर बार-बार 'राम राम' अंकित है, भक्ति की विशिष्ट परंपरा को दर्शाता है। वहीं हतकेश्वर महादेव, बुधेश्वर महादेव, जय मां कुदरगढ़ी और मधेश्वर महादेव जैसे धार्मिक स्थलों से जुड़े स्मृति-चिह्न भी शामिल हैं।
संग्रह में आधुनिक छत्तीसगढ़ की तस्वीर भी दिखाई देती है। महतारी वंदन योजना को दर्शाने वाला वुडकट पैनल, छत्तीसगढ़ विधानसभा की रजत जयंती का स्मृति-चिह्न और नया रायपुर की विभिन्न संस्थाओं को दर्शाने वाले मॉडल प्रदेश की वर्तमान विकास यात्रा को उसकी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं।
छत्तीसगढ़ से जुड़े इन स्मृति-चिह्नों की ई-नीलामी की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है। नीलामी से प्राप्त राशि नमामि गंगे परियोजना को सहयोग देने के लिए इस्तेमाल की जाएगी। इच्छुक लोग आधिकारिक पीएम स्मृति-चिह्न ई-नीलामी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन बोली लगा सकते हैं।
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