Simran Mallick / Fri, Sep 11, 2026 / Post views : 1
नई दिल्ली। गणेश उत्सव के दौरान चारों ओर एक ही जयकारा गूंजता है—‘गणपति बप्पा मोरया’। भगवान गणेश के स्वागत से लेकर विसर्जन तक भक्त इस जयकारे को पूरे उत्साह के साथ लगाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान गणेश के नाम के साथ ‘मोरया’ शब्द क्यों जोड़ा जाता है? इसके पीछे भगवान गणेश के परम भक्त मोरिया गोसावी से जुड़ी एक प्रसिद्ध धार्मिक मान्यता बताई जाती है।
कौन थे मोरिया गोसावी?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मोरिया गोसावी भगवान गणेश के अनन्य भक्त थे। उनका संबंध महाराष्ट्र के चिंचवड़ और मोरगांव स्थित प्रसिद्ध गणेश मंदिरों से बताया जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने अपना जीवन भगवान गणेश की भक्ति और पूजा-अर्चना में समर्पित कर दिया था।
मान्यता है कि मोरिया गोसावी गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश के दर्शन के लिए चिंचवड़ से मोरगांव तक लंबी यात्रा करते थे। बढ़ती उम्र के साथ उनके लिए यह यात्रा कठिन होने लगी, लेकिन उनकी भक्ति और श्रद्धा में कमी नहीं आई।
भक्त की भक्ति से प्रसन्न हुए गणेश जी
पौराणिक कथा के अनुसार, मोरिया गोसावी की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए। मान्यता है कि गणेश जी ने उन्हें संकेत दिया कि उन्हें नदी में उनकी प्रतिमा प्राप्त होगी।
अगले दिन मोरिया गोसावी नदी में स्नान करने पहुंचे। कथा के अनुसार, उन्हें वहां भगवान गणेश की प्रतिमा मिली। इसके बाद उन्होंने उसी स्थान पर गणेश जी की आराधना शुरू कर दी। इस घटना को उनके और भगवान गणेश के बीच विशेष आध्यात्मिक संबंध से जोड़कर देखा जाता है।
ऐसे प्रसिद्ध हुआ ‘मोरया’ नाम
मोरिया गोसावी की गणेश भक्ति की चर्चा धीरे-धीरे दूर-दूर तक फैलने लगी। धार्मिक परंपरा में उनका नाम भगवान गणेश की भक्ति के साथ जुड़ गया। इसी वजह से गणेश जी के जयकारे में ‘मोरया’ शब्द का इस्तेमाल होने की मान्यता प्रचलित हुई।
‘गणपति बप्पा मोरया’ में ‘गणपति’ और ‘बप्पा’ भगवान गणेश के लिए श्रद्धा के संबोधन हैं, जबकि ‘मोरया’ को उनके परम भक्त मोरिया गोसावी से जोड़ा जाता है। भक्तिभाव से जुड़े इस जयकारे का उद्देश्य भगवान गणेश और उनके भक्त के बीच प्रेम और समर्पण की भावना को व्यक्त करना माना जाता है।
‘मंगलमूर्ति मोरया’ का भी है विशेष महत्व
गणेश भक्ति की परंपरा में ‘मंगलमूर्ति मोरया’ का जयकारा भी काफी प्रसिद्ध है। ‘मंगलमूर्ति’ भगवान गणेश के शुभ और मंगलकारी स्वरूप का संबोधन है। इस तरह यह जयकारा भगवान गणेश की महिमा और उनके भक्त मोरिया गोसावी के प्रति श्रद्धा, दोनों को एक साथ व्यक्त करता है।
हालांकि, ‘मोरया’ शब्द की उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग धार्मिक और ऐतिहासिक मत भी मिलते हैं। इसलिए इसे मुख्य रूप से लोकप्रिय धार्मिक मान्यता और भक्ति परंपरा के रूप में समझा जाता है।
आज ‘गणपति बप्पा मोरया’ केवल एक जयकारा नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों की आस्था, प्रेम और भगवान गणेश के प्रति समर्पण का प्रतीक बन चुका है।
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