Rashtriya Seva Johar / Sun, Aug 23, 2026 / Post views : 9
भोपाल, 23 अगस्त 2026।
मनरेगा दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलेश्वर पटेल ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को देश के गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों के लिए ऐतिहासिक अधिकार बताते हुए केंद्र की भाजपा सरकार पर इसके मूल स्वरूप और भावना को कमजोर करने का आरोप लगाया।
कमलेश्वर पटेल ने कहा कि 23 अगस्त 2005 को डॉ. मनमोहन सिंह जी के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने मनरेगा के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के रोजगार का कानूनी अधिकार प्रदान किया था। यह केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि गांव के गरीब और मजदूर के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुरक्षा की मजबूत गारंटी थी।
उन्होंने कहा कि मनरेगा के माध्यम से देश के गांवों में सड़क निर्माण, जल संरक्षण, तालाब एवं जलस्रोतों का विकास, वृक्षारोपण और आजीविका से जुड़े लाखों कार्य हुए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।
पूर्व मंत्री ने कहा कि आज भाजपा सरकार उसी ऐतिहासिक योजना के स्वरूप और नाम में बदलाव कर उसकी मूल भावना को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि योजनाओं का नाम बदलने से उनका इतिहास और जनता के संघर्ष से जुड़ी उनकी पहचान नहीं बदली जा सकती।
कमलेश्वर पटेल ने कहा, “नाम बदलने से इतिहास नहीं बदलता। मनरेगा कांग्रेस सरकार की वह ऐतिहासिक देन है, जिसने देश के गरीब और मजदूर को रोजगार का कानूनी अधिकार दिया। यह अधिकार गांव के श्रमिकों के सम्मान और उनके जीवन में आर्थिक सुरक्षा का आधार बना।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी और मनरेगा के मूल स्वरूप एवं रोजगार के कानूनी अधिकार को कमजोर नहीं होने देगी।
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