नई दिल्ली। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। तिरंगा फहराने के बाद दिए गए अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को सामने रखते हुए आने वाले वर्षों के लिए विकास की व्यापक दिशा बताई। यह प्रधानमंत्री मोदी का लाल किले से लगातार 13वां स्वतंत्रता दिवस संबोधन रहा। प्रधानमंत्री के संबोधन में देश की आर्थिक और तकनीकी ताकत बढ़ाने के साथ-साथ युवा शक्ति, आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, सेमीकंडक्टर, रक्षा क्षमता और भारतीय उद्योगों को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिखाई दिया। 2047 तक विकसित भारत का संकल्प:प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के सामने अब 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का बड़ा लक्ष्य है। उन्होंने देशवासियों से इस लक्ष्य को केवल सरकार का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प बनाने की अपील की।उन्होंने भारत की विकास यात्रा को तेज करने के लिए नई तकनीक, आधुनिक उद्योग, आत्मनिर्भर उत्पादन और युवाओं की क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल करने पर जोर दिया। ‘शक्ति की सप्तधारा’ से विकास की नई दिशा:भाषण की प्रमुख बातों में प्रधानमंत्री द्वारा सामने रखा गया ‘शक्ति की सप्तधारा’ का विजन रहा। इसका उद्देश्य भारत की विकास यात्रा को कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक साथ गति देना है।इसमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर व गतिशक्ति, रक्षा, ग्रीन एवं ब्लू इकोनॉमी तथा भारत की सॉफ्ट पावर जैसे क्षेत्र शामिल बताए गए हैं। यानी विकास का लक्ष्य केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादन, खेती, तकनीक, सुरक्षा, पर्यावरण, समुद्री क्षमता और भारतीय संस्कृति को भी भविष्य की ताकत के रूप में देखा गया है।दुनिया के शीर्ष स्तर पर भारतीय कंपनियों का लक्ष्यप्रधानमंत्री ने भारतीय उद्योग जगत के सामने भी बड़ा लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि आने वाले दशक में कम से कम 50 भारतीय कंपनियों को Fortune 500 में पहुंचाने का लक्ष्य होना चाहिए।इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने आकांक्षा जताई कि कम से कम एक भारतीय बैंक दुनिया के शीर्ष पांच बैंकों में और एक भारतीय फार्मा कंपनी दुनिया की शीर्ष पांच फार्मास्युटिकल कंपनियों में शामिल हो। यह संदेश भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर की कंपनियां और ब्रांड तैयार करने वाले देश के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।युवा शक्ति को विकास का आधार:प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं की भूमिका को विशेष महत्व दिया। उन्होंने युवाओं की ऊर्जा, नई सोच, तकनीकी क्षमता, नवाचार और उद्यमिता को विकसित भारत के निर्माण से जोड़ने की बात कही। प्रधानमंत्री के संदेश का एक अहम पहलू यह रहा कि 2047 का भारत आज के युवाओं की मेहनत, कौशल और फैसलों से तैयार होगा।सेमीकंडक्टर और तकनीक में आत्मनिर्भरता:भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर भी प्रधानमंत्री ने जोर दिया। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर और आधुनिक तकनीक जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में देश की घरेलू क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर उन्होंने बात रखी। सेमीकंडक्टर आज मोबाइल, कंप्यूटर, वाहन, रक्षा उपकरण से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक लगभग हर आधुनिक तकनीक का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इस क्षेत्र में भारत की क्षमता बढ़ाना आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों पर फोकसप्रधानमंत्री ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता को भी विकास के लिए जरूरी बताया। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सेमीकंडक्टर और आधुनिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की भूमिका और बढ़ने वाली है।इसलिए भारत को इन संसाधनों की खोज, उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया गया। कृषि और फूड प्रोसेसिंग को भी विकास की धारा में शामिल किया:‘सप्तधारा’ के तहत कृषि और फूड प्रोसेसिंग को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। इसका अर्थ केवल अधिक उत्पादन नहीं, बल्कि कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन, प्रसंस्करण और बेहतर बाजार व्यवस्था के जरिए किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता:भारत की सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने का संदेश भी संबोधन में महत्वपूर्ण रहा। प्रधानमंत्री ने देश की रणनीतिक क्षमता और स्वदेशी तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा पर जोर दिया।इसका उद्देश्य रक्षा जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ भारत को रक्षा उत्पादन और तकनीक के क्षेत्र में मजबूत बनाना है।ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी पर भी नजर:विकास की दिशा में ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी को भी महत्व दिया गया। इसका संबंध पर्यावरण अनुकूल विकास, स्वच्छ ऊर्जा, समुद्री संसाधनों और तटीय अर्थव्यवस्था से है।प्रधानमंत्री के संदेश में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए भारत की प्राकृतिक और समुद्री क्षमता का बेहतर उपयोग करने की दिशा भी सामने आई। योग, फिल्म और संस्कृति भी भारत की ताकत:प्रधानमंत्री ने भारत की सॉफ्ट पावर को भी विकास की एक महत्वपूर्ण ताकत के रूप में सामने रखा। योग, भारतीय संस्कृति, फिल्म, VFX और गेमिंग जैसे क्षेत्रों को दुनिया में भारत की पहचान और आर्थिक अवसरों से जोड़ने की दिशा पर जोर दिया गया। इससे संकेत मिलता है कि भारत की ताकत केवल उद्योग और तकनीक में ही नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति और रचनात्मक क्षमता में भी देखी जा रही है।बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदनाप्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और प्रभावित परिवारों को सरकार की ओर से मदद और पुनर्वास का भरोसा दिया। नक्सलवाद पर भी कड़ा संदेश:प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने सशस्त्र नक्सली हिंसा के कमजोर पड़ने की बात कहते हुए ‘दिमागी नक्सलवाद’ के खिलाफ भी सतर्क रहने का संदेश दिया। यह संबोधन के आंतरिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक रहा। ‘वंदे मातरम्’ से हुआ ऐतिहासिक समापन:इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम्’ का विशेष महत्व रहा। 150 वर्ष की विरासत से जुड़े आयोजन के तहत लाल किले पर समारोह में पहली बार राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति हुई। प्रधानमंत्री के संबोधन के समापन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ की गूंज ने समारोह को विशेष राष्ट्रीय भाव दिया। स्वतंत्रता से विकसित भारत तक की यात्रा:प्रधानमंत्री के पूरे संबोधन को देखा जाए तो इसका केंद्रीय संदेश स्वतंत्रता के बाद की उपलब्धियों से आगे बढ़कर 2047 के भारत की तैयारी रहा।एक ओर उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन किया, वहीं दूसरी ओर युवाओं, उद्योग, तकनीक, कृषि, ऊर्जा, रक्षा और संस्कृति को भविष्य के भारत की ताकत बनाने की दिशा रखी।2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य अब केवल एक दूर की तारीख नहीं, बल्कि आज लिए जाने वाले फैसलों और तैयारियों से जुड़ा राष्ट्रीय लक्ष्य बताया गया।