Simran Mallick / Tue, Oct 13, 2026 / Post views : 50
रायपुर: शारदीय नवरात्र के दौरान महाष्टमी का दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही घरों और मंदिरों में हवन तथा कन्या पूजन का आयोजन होता है। इस बार महाष्टमी की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति है। ऐसे में श्रद्धालु अष्टमी तिथि, कन्या पूजन के शुभ समय और पूजा विधि की जानकारी जानना चाहते हैं।
पंचांग संबंधी उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:27 बजे शुरू होगी और 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 19 अक्टूबर, सोमवार को महाष्टमी मनाने और कन्या पूजन करने की जानकारी दी गई है।
हालांकि, नवरात्र के व्रत और पूजा की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं। इसलिए श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा की तारीख सुनिश्चित करें।
ज्योतिषीय विवरण के अनुसार, 19 अक्टूबर को कन्या पूजन के लिए निम्न समय बताए गए हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 से 5:40 बजे तक
अमृत काल: सुबह 7:28 से 9:16 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 से दोपहर 12:34 बजे तक
श्रद्धालु अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं। मुहूर्त की सटीक जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग देखना उचित रहेगा।
नवरात्र में कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि कन्या पूजन से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस अवसर पर श्रद्धालु कन्याओं को भोजन कराते हैं और उन्हें फल, मिठाई तथा उपहार भेंट करते हैं।
कई परिवारों में कन्याओं के साथ एक बालक को बटुक भैरव के प्रतीक के रूप में भोजन कराने की परंपरा भी निभाई जाती है।
महाष्टमी के दिन सुबह स्नान करके घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। इसके बाद मां दुर्गा और मां महागौरी की पूजा-अर्चना करें। कन्याओं का सम्मानपूर्वक स्वागत कर उन्हें आसन पर बैठाएं और परंपरा के अनुसार तिलक लगाकर पुष्प अर्पित करें।
इसके बाद कन्याओं को पूरी, हलवा, चना और अन्य सात्विक भोजन परोसें। भोजन के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार फल, मिठाई, दक्षिणा या उपहार दें। अंत में मां दुर्गा से परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। महाष्टमी पर श्रद्धालु व्रत, हवन और पूजा के माध्यम से माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं। नवरात्र का यह दिन भक्ति, श्रद्धा और सेवा का संदेश भी देता है।
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