Simran Mallick / Wed, Oct 14, 2026 / Post views : 41
रायपुर: शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है। वर्ष 2026 में 14 अक्टूबर, बुधवार को नवरात्रि का चौथा दिन मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा की आराधना सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की कामना के लिए की जाती है। इस दिन भक्त विधि-विधान से पूजा करके परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।
मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक चित्रों में उनकी आठ भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, जपमाला, गदा और चक्र सुशोभित हैं। मां सिंह पर सवार रहती हैं और उनका तेज सूर्य के समान माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें सृष्टि की उत्पत्ति और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है।
नवरात्रि के चौथे दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर मां दुर्गा और मां कूष्मांडा का ध्यान करें। देवी के सामने दीपक जलाकर पूजा का संकल्प लें।
मां को लाल फूल, फल, मिठाई और सात्विक पकवान अर्पित करें। इसके बाद मां कूष्मांडा के मंत्र का जाप करें। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं। पूजा के अंत में मां की आरती कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा भक्त फल, मिठाई और अन्य सात्विक पकवान भी चढ़ा सकते हैं। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों में वितरित किया जाता है।
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना के दौरान इस मंत्र का जाप किया जाता है।
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप करने से मन को शांति और एकाग्रता प्राप्त करने में सहायता मिलती है। भक्त मां से जीवन में सुख, स्वास्थ्य, सकारात्मकता और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना करके भक्त माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।
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