Simran Mallick / Tue, Oct 13, 2026 / Post views : 56
रायपुर। छत्तीसगढ़ में पटवारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन शुरू कर दिया है। प्रदेशभर के पटवारी आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। पटवारियों ने PV ऐप के जरिए काम करने की व्यवस्था का विरोध करते हुए वेतन विसंगति दूर करने और पदोन्नति से जुड़े मामलों का जल्द निराकरण करने की मांग की है। इस आंदोलन के तहत प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पटवारी प्रदर्शन कर शासन तक अपनी आवाज पहुंचाएंगे।
पटवारियों की प्रमुख मांग PV ऐप के माध्यम से काम करने की व्यवस्था को बंद करने की है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था में काम करने के दौरान व्यावहारिक समस्याएं सामने आ रही हैं। इसके साथ ही पटवारी लंबे समय से लंबित वेतन विसंगति दूर करने और पदोन्नति से जुड़े मुद्दों का समाधान करने की मांग कर रहे हैं।
पटवारियों के मुताबिक, इन मांगों को लेकर पहले भी चर्चा हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। इसी के चलते उन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है।
पटवारियों की हड़ताल के बीच राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा का बयान भी सामने आया है। उन्होंने PV ऐप के माध्यम से सर्वे करने की व्यवस्था को प्रदेश और किसानों के हित में बताया है। मंत्री के अनुसार, मौके पर जाकर काम करने में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन इन समस्याओं के कारण जरूरी कार्यों को रोकना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि PV ऐप के जरिए सर्वे का काम करना आवश्यक है। सरकार का उद्देश्य सर्वे प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना और आगामी धान खरीदी में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
राजस्व मंत्री ने बताया कि पिछले साल कुछ खसरे ऑनलाइन दर्ज नहीं होने के कारण धान खरीदी की प्रक्रिया मैनुअल तरीके से करनी पड़ी थी। सरकार चाहती है कि इस साल ऐसी स्थिति दोबारा न बने और धान खरीदी की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो।
इसी उद्देश्य से PV ऐप के जरिए सर्वे कार्य को जरूरी माना जा रहा है। वहीं, पटवारी इस व्यवस्था को लेकर अपनी आपत्तियां जता रहे हैं और अन्य लंबित मांगों के समाधान पर जोर दे रहे हैं।
PV ऐप को लेकर सरकार और पटवारियों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। एक ओर सरकार धान खरीदी में पारदर्शिता के लिए सर्वे को जरूरी बता रही है, वहीं दूसरी ओर पटवारी अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने के पक्ष में हैं।
अब देखना होगा कि अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच सरकार और पटवारी संगठनों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं। आंदोलन का असर राजस्व संबंधी कार्यों और सर्वे प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।
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