RESHAM SAHU / Wed, Jul 15, 2026 / Post views : 21
रायपुर।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य की विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया। राज्य गठन के बाद यह विधानसभा में लाया गया 10वां अविश्वास प्रस्ताव है। प्रस्ताव को सदन की आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद चर्चा के लिए स्वीकार किया जाएगा।
कांग्रेस ने सरकार पर कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याओं, बेरोजगारी, औद्योगिक दुर्घटनाओं, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जनहित के विभिन्न मुद्दों पर विफल रहने का आरोप लगाया है। वहीं सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि सदन में सभी सवालों का तथ्यात्मक जवाब दिया जाएगा।
राज्य गठन के बाद अब तक विधानसभा में कुल 9 बार अविश्वास प्रस्ताव लाए जा चुके हैं, लेकिन किसी भी प्रस्ताव से सरकार नहीं गिरी। इस बार भी सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा और मतदान होने की संभावना है। विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम है, लेकिन इस बहस के जरिए विपक्ष को सरकार को विभिन्न जनहित के मुद्दों पर घेरने का अवसर मिलेगा।
अविश्वास प्रस्ताव भारतीय संसदीय लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण संसदीय प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से विपक्ष सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास करता है। सदन में होने वाली चर्चा पर प्रदेश की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं।
इस बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होने की संभावना है। विपक्ष जहां सरकार की कार्यप्रणाली और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगा, वहीं सरकार अपने कार्यकाल की उपलब्धियों और फैसलों का बचाव करती नजर आएगी। ऐसे में यह चर्चा प्रदेश की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र बनने वाली है।
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