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CG Culture in School : छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति अब पढ़ेंगे कक्षा 6 से 12वीं तक के छात्र, 100 विषयों पर तैयार होगी सामग्री

Simran Mallick / Tue, Aug 25, 2026 / Post views : 113

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए राज्य में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की जा रही है। अब कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की स्थानीय कला, संस्कृति, इतिहास, लोकजीवन और परंपराओं से जुड़ी विशेष पाठ्य सामग्री पढ़ने को मिल सकती है।

स्कूल शिक्षा विभाग की इस पहल के तहत छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित ‘आर्ट रिपोजिटरी’ तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में अपनी स्थानीय विरासत के प्रति समझ, संवेदना और गौरव की भावना विकसित करना है।

रायपुर में तीन दिवसीय कार्यशाला

इस पहल के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), शंकर नगर, रायपुर में 24 से 26 अगस्त तक तीन दिवसीय आवासीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है।

कार्यशाला में प्रदेशभर से साहित्यकार, संस्कृतिविद, विषय विशेषज्ञ, शोधकर्ता और जनसंचार विशेषज्ञ शामिल होकर छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति से संबंधित सामग्री तैयार करने में योगदान दे रहे हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार की जा रही इस सामग्री का उपयोग विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों, प्रशिक्षकों, शैक्षिक प्रबंधकों और पालक समुदाय को भी स्थानीय सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के लिए किया जाएगा।

करीब 100 विषयों पर तैयार होगी पाठ्य सामग्री

कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, सभ्यता और कला से जुड़े करीब 100 विषयों पर सामग्री तैयार की जा रही है। इसके लिए अलग-अलग विषयों के समूह बनाए गए हैं, जिनमें विशेषज्ञ और लेखक सामग्री तैयार कर रहे हैं।

इसमें छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, लोकनृत्य, लोकसंगीत, शिल्प, पर्व-त्योहार, स्थापत्य कला, तीर्थ स्थलों और ऐतिहासिक विरासत को प्रमुखता दी जाएगी।

5 से 10 मिनट की लघु फिल्में भी बनेंगी

पाठ्य सामग्री को विद्यार्थियों के लिए अधिक रोचक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से संबंधित विषयों पर 5 से 10 मिनट की लघु फिल्मों के लिए पटकथा भी तैयार की जाएगी।

इससे विद्यार्थियों को केवल किताबों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि दृश्य माध्यम से भी छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा।

इन विभूतियों को भी मिलेगा स्थान

‘आर्ट रिपोजिटरी’ में छत्तीसगढ़ से जुड़ी अनेक प्रमुख विभूतियों, संतों और महापुरुषों के योगदान को भी शामिल किया जाएगा।

इनमें गुरु घासीदास, राजा चक्रधर, पद्मश्री तीजन बाई, विनोद कुमार शुक्ल, मिनीमाता, माधवराव सप्रे, पंडित सुंदरलाल शर्मा, शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर सहित अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तित्व शामिल हैं।

इसके अलावा लोमश ऋषि, वाल्मीकि, वल्लभाचार्य, सुरुज बाई खांडे, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और मुकुटधर पाण्डेय जैसी विभूतियों के योगदान को भी सामग्री में स्थान दिए जाने की बात कही गई है।

स्थानीय संस्कृति से जुड़ेंगे विद्यार्थी

इस पहल का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। स्थानीय इतिहास, लोककला, साहित्य, संगीत और परंपराओं को शिक्षा से जोड़ने से विद्यार्थियों को अपने प्रदेश की विविधता और विरासत को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

आने वाले समय में तैयार की गई सामग्री को स्कूली शिक्षा में किस रूप में शामिल किया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी संबंधित विभाग की ओर से आगे जारी की जा सकती है।

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