बिजनेस डेस्क: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर नरमी देखने को मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की संभावना बढ़ने से वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति बेहतर होने की उम्मीद बनी है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, इसका असर फिलहाल भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर दिखाई नहीं दिया है।
सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने बुधवार सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी किए, जिनमें किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। पिछले कई महीनों से देश के अधिकांश शहरों में ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आज पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है। राजधानी में 25 मई 2026 के बाद से पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के सस्ता होने के बावजूद आम उपभोक्ताओं को अभी तक इसका सीधा लाभ नहीं मिल पाया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच संबंधों में सुधार की उम्मीद से वैश्विक बाजार में सकारात्मक माहौल बना है। साथ ही दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में कच्चे तेल की मांग को लेकर बनी अनिश्चितता भी कीमतों पर दबाव बना रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में WTI क्रूड फ्यूचर्स (सितंबर वायदा) करीब 0.46 फीसदी की गिरावट के साथ 75.42 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया। कारोबार के दौरान इसका निचला स्तर 74.66 डॉलर और ऊपरी स्तर 75.50 डॉलर प्रति बैरल रहा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट जारी रहती है और डॉलर-रुपये की विनिमय दर समेत अन्य आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है। इससे आम वाहन चालकों के साथ-साथ परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी फायदा होगा। फिलहाल तेल कंपनियों ने ईंधन के दामों में कोई बदलाव नहीं किया है, इसलिए उपभोक्ताओं को कीमतों में कटौती के लिए अभी इंतजार करना होगा।
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