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तिरंगे के शिल्पकार को जन्मदिन पर उन्हें शत शत नमन : तिरंगे के पीछे छिपी वो अनसुनी कहानी जिसने भारत को दिया गर्व का सबसे बड़ा प्रतीक

Rashtriya Seva Johar / Sun, Aug 2, 2026 / Post views : 193

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नई दिल्ली/छत्तीसगढ, 2 अगस्त।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के शिल्पकार और महान स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया की जयंती पर देशभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ राष्ट्र सेवा जोहार के सभी टीम सदस्यों ने भी उनके अतुलनीय योगदान को नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

एक विचार जिसने बदल दी भारत की पहचान

पिंगली वेंकैया का जन्म 2 अगस्त 1876 को वर्तमान आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में हुआ था। वे बहुभाषाविद, कृषिविज्ञानी, शिक्षाविद और सच्चे देशभक्त स्वतंत्रता सेनानी थे। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के स्वरूप पर उन्होंने गहन अध्ययन किया और अनेक डिज़ाइन तैयार कर राष्ट्र के सामने एक नई सोच प्रस्तुत की।

जब पहली बार दुनिया ने देखा तिरंगे का सपना

साल 1921 में विजयवाड़ा में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में पिंगली वेंकैया ने महात्मा गांधी को ध्वज का प्रारूप प्रस्तुत किया था। बाद में इसमें आवश्यक संशोधन किए गए और यही स्वरूप आगे चलकर भारत के राष्ट्रीय ध्वज का आधार बना। स्वतंत्र भारत ने 22 जुलाई 1947 को तिरंगे को आधिकारिक राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया।

आपके लिए यह जानकारी भी महत्वपूर्ण है।

तिरंगा नहीं, एक भावना—एकता और स्वाभिमान का प्रतीक

पिंगली वेंकैया का मानना था कि राष्ट्रध्वज केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि देश की आत्मा, एकता, त्याग, शांति और सम्मान का जीवंत प्रतीक है। उनके प्रयासों ने भारत को ऐसा ध्वज दिया जो विविधता में एकता की पहचान बनकर आज भी हर भारतीय के हृदय में गर्व का संचार करता है।

संघर्षों से भरा जीवन, लेकिन राष्ट्र के लिए अटूट समर्पण

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भाग लिया और देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। जीवन के अंतिम वर्षों में वे साधारण परिस्थितियों में रहे, लेकिन राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण सदैव प्रेरणास्रोत बना रहा।

4 जुलाई 1963 को उनका निधन हो गया, किंतु तिरंगे के साथ उनका नाम अमर हो गया। आज जब भी राष्ट्रीय ध्वज सम्मानपूर्वक फहराया जाता है, तब पिंगली वेंकैया के अद्वितीय योगदान को देश कृतज्ञता के साथ याद करता है।

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नई पीढ़ी के लिए अमर प्रेरणा

जयंती के अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि नई पीढ़ी को पिंगली वेंकैया के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्रप्रेम, समर्पण और एकता के मूल्यों को अपनाना चाहिए। तिरंगे का सम्मान करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

अंत में राष्ट्रीय सेवा जोहार की पूरी टीम के द्वार राष्ट्र सेवा के इस महान पथप्रदर्शक पिंगली वेंकैया शत-शत नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।

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Pingali Venkayya ji

Tirange ke shilpkar

2 August Pingali venkayya jayanti

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