Simran Mallick / Tue, Sep 15, 2026 / Post views : 3
Vishwakarma Puja 2026: हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार और दिव्य वास्तुकार माना जाता है। भगवान विश्वकर्मा को समर्पित विश्वकर्मा जयंती के दिन घरों, दुकानों, कारखानों और कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों और उपकरणों की पूजा की जाती है। खासतौर पर इंजीनियर, कारीगर, तकनीकी कर्मचारी और श्रमिक इस दिन भगवान विश्वकर्मा की आराधना कर सुख-समृद्धि और कार्य में सफलता की कामना करते हैं। साल 2026 में विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी।
17 सितंबर को ही क्यों मनाई जाती है विश्वकर्मा पूजा?
विश्वकर्मा पूजा की तारीख चंद्रमा की स्थिति से नहीं, बल्कि सूर्य की गति और संक्रांति से जुड़ी होती है। यह पर्व हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाया जाता है। कन्या संक्रांति उस समय होती है जब सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करता है।
आमतौर पर सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश 16 या 17 सितंबर के आसपास होता है। वर्ष 2026 में सूर्य 17 सितंबर को कन्या राशि में प्रवेश करेगा, इसलिए इसी दिन विश्वकर्मा पूजा मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं में इसी दिन भगवान विश्वकर्मा के प्राकट्य से भी इस पर्व को जोड़ा जाता है। इसी वजह से इसे विश्वकर्मा जयंती भी कहा जाता है।
भगवान विश्वकर्मा को क्यों माना जाता है देव शिल्पी?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा देवताओं के दिव्य शिल्पकार हैं। उन्हें निर्माण, वास्तुकला, शिल्प और तकनीकी कौशल का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने देवताओं के लिए भव्य भवनों और नगरों का निर्माण किया था।
इसी धार्मिक मान्यता के कारण निर्माण, वास्तुकला, इंजीनियरिंग, मशीनरी और तकनीकी कार्यों से जुड़े लोग विश्वकर्मा पूजा को विशेष महत्व देते हैं। इस दिन मशीनों और औजारों की पूजा कर कार्य में उन्नति और सफलता की कामना की जाती है।
भगवान विश्वकर्मा से जुड़ी प्रमुख मान्यताएं
पौराणिक कथाओं में भगवान विश्वकर्मा को देव शिल्पी बताया गया है। अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में उनके जन्म और वंश को लेकर अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं। कई कथाओं में उन्हें सोने की लंका, द्वारका और पुष्पक विमान जैसे अद्भुत निर्माणों से जोड़ा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं में भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र और भगवान शिव के त्रिशूल जैसे दिव्य अस्त्रों के निर्माण का श्रेय भी भगवान विश्वकर्मा को दिया जाता है। हालांकि, इन कथाओं के विवरण अलग-अलग पुराणिक और क्षेत्रीय परंपराओं में भिन्न मिलते हैं।
Vishwakarma Puja 2026 शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में कन्या संक्रांति 17 सितंबर की सुबह 7:58 बजे होने की जानकारी दी गई है। इसी समय से विश्वकर्मा पूजा का शुभ समय माना जा रहा है। पूजा के लिए शुभ अवधि सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक बताई गई है।
वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा। इस दौरान भगवान विश्वकर्मा की पूजा और मशीनों, औजारों व कार्यस्थल की आराधना करना शुभ माना जाता है।
नोट: पूजा के मुहूर्त में स्थान के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
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