Simran Mallick / Tue, Sep 29, 2026 / Post views : 2
Pitra Chalisa: हिंदू धर्म में पितरों यानी पूर्वजों का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध, तर्पण और पितरों का स्मरण करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी क्रम में श्री पितर चालीसा का पाठ भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है।
मान्यता है कि पितरों का सम्मान और स्मरण करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। वहीं, पितरों की उपेक्षा को कई धार्मिक परंपराओं में जीवन में आने वाली परेशानियों से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इनके प्रभाव के बारे में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
पितर चालीसा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितर अपने वंशजों के लिए आशीर्वाद और संरक्षण का प्रतीक माने जाते हैं। पितृ पक्ष में श्रद्धा के साथ उनका स्मरण, तर्पण और पूजा करने की परंपरा है। इसी दौरान कई लोग पितर चालीसा का पाठ भी करते हैं।
पितर चालीसा में पूर्वजों की महिमा, उनके प्रति श्रद्धा और आशीर्वाद की कामना का वर्णन किया गया है। इसमें पितरों से परिवार की सुख-समृद्धि और संकटों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
पितर चालीसा का पाठ
॥ दोहा ॥
हे पितरेश्वर आपको।
दे दियो आशीर्वाद।।
चरणाशीश नवा दियो।
रखदो सिर पर हाथ।।
सबसे पहले गणपत।
पाछे घर का देव मनावा जी।।
हे पितरेश्वर दया राखियो।
करियो मन की चाया जी।।
॥ चौपाई ॥
पितरेश्वर करो मार्ग उजागर।
चरण रज की मुक्ति सागर॥
परम उपकार पितरेश्वर कीन्हा।
मनुष्य योनि में जन्म दीन्हा॥
मातृ-पितृ देव मनजो भावे।
सोई अमित जीवन फल पावे॥
जय जय जय पित्तर जी साईं।
पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं॥
चारों ओर प्रताप तुम्हारा।
संकट में तेरा ही सहारा॥
नारायण आधार सृष्टि का।
पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का॥
प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते।
भाग्य द्वार आप ही खुलवाते॥
झुंझुनू में दरबार है साजे।
सब देवों संग आप विराजे॥
प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा।
कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा॥
पित्तर महिमा सबसे न्यारी।
जिसका गुण गावे नर नारी॥
तीन मंडल में आप विराजे।
बसु रुद्र आदित्य में साजे॥
नाथ सकल संपदा तुम्हारी।
मैं सेवक समेत सुत नारी॥
छप्पन भोग नहीं हैं भाते।
शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते॥
तुम्हारे भजन परम हितकारी।
छोटे बड़े सभी अधिकारी॥
भानु उदय संग आप पुजावै।
पांच अंजुलि जल रिझावे॥
ध्वज पताका मंडप में साजे।
अखंड ज्योति में आप विराजे॥
सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी।
धन्य हुई जन्म भूमि हमारी॥
शहीद हमारे यहां पुजाते।
मातृ भक्ति संदेश सुनाते॥
जगत पितरों सिद्धांत हमारा।
धर्म जाति का नहीं है नारा॥
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई।
सब पूजे पित्तर भाई॥
हिंदू वंश वृक्ष है हमारा।
जान से ज्यादा हमको प्यारा॥
गंगा ये मरुप्रदेश की।
पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की॥
बंधु छोड़ना इनके चरणां।
इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा॥
चौदस को जागरण करवाते।
अमावस को हम धोक लगाते॥
जात जडूला सभी मनाते।
नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते॥
धन्य जन्म भूमि का वो फूल है।
जिसे पितृ मंडल की मिली धूल है॥
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