Simran Mallick / Tue, Sep 8, 2026 / Post views : 2
नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर कई बार यूजर्स को अपनी पसंद और विचारों से बिल्कुल अलग पोस्ट लगातार दिखाई देती हैं। खासतौर पर राजनीतिक और संवेदनशील मुद्दों पर यह अनुभव ज्यादा देखने को मिलता है। अब एक नई वैज्ञानिक रिसर्च ने इस तरह के कंटेंट के पीछे काम करने वाले एल्गोरिदमिक सिस्टम और यूजर व्यवहार के बीच संबंध पर रोशनी डाली है।
‘Proceedings of the National Academy of Sciences’ (PNAS) में प्रकाशित अध्ययन में अमेरिका के 715 X यूजर्स के फीड और ऑनलाइन व्यवहार का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि यूजर्स की प्रतिक्रियाएं किस तरह एल्गोरिदम को प्रभावित करती हैं और इसके बाद उन्हें किस तरह की पोस्ट दिखाई जाती हैं।
X का ‘For You’ सेक्शन अलग-अलग पोस्ट्स में से उन कंटेंट को चुनने के लिए एल्गोरिदमिक सिस्टम का इस्तेमाल करता है, जिनसे यूजर के जुड़ने की संभावना अधिक मानी जाती है। इसके लिए यूजर के लाइक, रिप्लाई और अन्य तरह के इंटरैक्शन जैसे संकेत महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
रिसर्च में मानवीय मूल्यों से जुड़े अलग-अलग विषयों को भी देखा गया। अध्ययन के मुताबिक, फीड में कुछ तरह के मूल्यों और विषयों से जुड़ी पोस्ट्स को अपेक्षाकृत अधिक बढ़ावा मिलने के संकेत मिले, जबकि पर्यावरण, देखभाल, भरोसे और सहिष्णुता जैसे विषयों से जुड़ी पोस्ट्स को कम प्राथमिकता मिलने की बात सामने आई।
सोशल मीडिया पर यूजर का व्यवहार एल्गोरिदम के लिए महत्वपूर्ण डेटा बन जाता है। किसी पोस्ट से सहमत होने पर यूजर केवल लाइक करके आगे बढ़ सकता है, जबकि असहमति होने पर वह रिप्लाई लिखकर बहस में शामिल हो सकता है।
यही व्यवहार एक दिलचस्प स्थिति पैदा कर सकता है। अगर एल्गोरिदम किसी रिप्लाई को मजबूत एंगेजमेंट का संकेत मानता है, तो जिस पोस्ट से यूजर वास्तव में नाराज या असहमत था, उसी तरह के कंटेंट को आगे भी ज्यादा दिखाए जाने की संभावना बढ़ सकती है।
अध्ययन में अमेरिकी राजनीतिक विचारधारा से जुड़े यूजर्स के व्यवहार का भी विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेटिक विचार रखने वाले प्रतिभागियों को उनके मूल्यों से असंगत कंटेंट का एक्सपोजर रिपब्लिकन यूजर्स की तुलना में अधिक मिला।
शोध में यह भी संकेत मिला कि डेमोक्रेटिक यूजर्स विरोधी विचारों वाली पोस्ट्स पर अधिक प्रतिक्रिया देते थे। इससे एक संभावित फीडबैक लूप बन सकता है—यूजर विरोधी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देता है, सिस्टम उस प्रतिक्रिया को एंगेजमेंट के तौर पर दर्ज करता है और इसी तरह के कंटेंट की पहुंच बढ़ सकती है।
रिसर्च का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सिर्फ अलग-अलग विचारों को दिखाना हमेशा स्वस्थ संवाद या बेहतर समझ पैदा नहीं करता। अगर यूजर लगातार ऐसे कंटेंट से इंटरैक्ट करता है जिससे वह नाराज या असहमत है, तो एंगेजमेंट आधारित सिस्टम अनजाने में विवादित या ध्रुवीकरण वाले कंटेंट को ज्यादा महत्व दे सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर यूजर को दिखाई देने वाली विरोधी पोस्ट केवल एल्गोरिदम की वजह से ही आती है। फीड पर कई तरह के संकेतों का प्रभाव पड़ सकता है और एल्गोरिदम समय के साथ यूजर के व्यवहार से सीखता रहता है।
शोधकर्ताओं ने ऐसे फीड मॉडल की जरूरत पर जोर दिया है जिसमें यूजर की व्यक्तिगत पसंद और मूल्यों को ज्यादा महत्व दिया जाए। इसे ‘Value-Aligned Feed’ जैसी अवधारणा के जरिए समझा जा सकता है।
ऐसे सिस्टम में यूजर खुद तय कर सके कि वह पर्यावरण, विज्ञान, कला, शिक्षा, शांति या अन्य विषयों से जुड़ी जानकारी को कितनी प्राथमिकता देना चाहता है। इससे केवल क्लिक, लाइक और रिप्लाई के आधार पर कंटेंट चुनने की निर्भरता कम हो सकती है।
इस अध्ययन से यह सवाल जरूर उठता है कि सोशल मीडिया एल्गोरिदम यूजर की पसंद को केवल उसकी रुचि से नहीं, बल्कि उसकी प्रतिक्रिया के तरीके से भी समझ सकते हैं। ऐसे में किसी पोस्ट से असहमति जताने के लिए किया गया रिप्लाई भी भविष्य की फीड को प्रभावित करने वाला संकेत बन सकता है।
हालांकि, सोशल मीडिया एल्गोरिदम बेहद जटिल सिस्टम हैं और किसी एक अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि X जानबूझकर हर यूजर को उसकी सोच के खिलाफ कंटेंट दिखाता है। फिर भी यह रिसर्च इस बात पर महत्वपूर्ण चर्चा जरूर शुरू करती है कि सोशल मीडिया पर यूजर की पसंद, एंगेजमेंट और एल्गोरिदमिक सिफारिशों के बीच संबंध किस तरह काम करता है।
Tags :
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन