Simran Mallick / Thu, Sep 3, 2026 / Post views : 1
नई दिल्ली: जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB) अभियान के तीसरे चरण JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। राज्य के पांच जिले भी जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के टॉप-10 जिलों में जगह बनाने में सफल रहे हैं।
नई दिल्ली में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी साझा की। वहीं ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के संरक्षण को लेकर राज्य में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि किसानों, पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को जोड़कर इसे जनअभियान का रूप दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कोरिया जिले से शुरू हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का भी उल्लेख किया। इस पहल के तहत किसान अपनी कृषि भूमि का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं।
इस जमीन पर ऐसी जल संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिनसे बारिश का पानी खेत से बाहर बहने के बजाय वहीं रुककर धीरे-धीरे जमीन के भीतर पहुंच सके। इस मॉडल में किसान केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि जल संरक्षण अभियान के सक्रिय भागीदार बने हैं।
जल संचय जन भागीदारी अभियान के पहले चरण JSJB 1.0 में छत्तीसगढ़ में 4,05,561 जल संरचनाएं बनाई गई थीं और राज्य देश में दूसरे स्थान पर रहा था।
वहीं JSJB 2.0 में 24,07,456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 23,07,768 का काम पूरा हो चुका है। इस चरण में भी छत्तीसगढ़ दूसरे स्थान पर रहा।
अब JSJB 3.0 में राज्य ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। इस चरण में 79,775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 77,719 संरचनाओं का काम पूरा हो चुका है।
छत्तीसगढ़ के 5 जिले टॉप-10 में
राज्य के प्रदर्शन के साथ ही पांच जिलों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।
जल संरक्षण के प्रयासों के बीच राज्य में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। इसके अलावा पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के भी सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान जताया गया है।
राज्य में बारिश के पानी को रोकने, पुराने जल स्रोतों के संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और जल संरचनाओं की मैपिंग के साथ नियमित मॉनिटरिंग पर भी जोर दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन—जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के संदेश को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू करने पर जोर दिया है। राज्य का लक्ष्य बारिश के अधिकतम पानी को गांव और खेत की सीमा के भीतर रोककर भू-जल स्तर को बेहतर करना है।
मुख्यमंत्री साय ने सुझाव दिया कि हर राज्य अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और जल उपलब्धता के अनुसार अलग ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करे। उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ शुरू करने का सुझाव भी दिया।
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