RESHAM SAHU / Fri, Jul 10, 2026 / Post views : 22
नई दिल्ली। भारत अपनी कुल कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है, लेकिन इसके बावजूद देश रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है। अब भारत सरकार और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाकर पेट्रोल और डीजल के निर्यात को और मजबूत करने की तैयारी कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, IOC दिसंबर 2026 तक अपनी रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने के लिए करीब ₹75,000 करोड़ की लागत वाला विस्तार परियोजना चला रही है। इस परियोजना पर अब तक ₹53,500 करोड़ से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।
इस विस्तार के बाद कंपनी की वार्षिक रिफाइनिंग क्षमता 80.75 मिलियन टन से बढ़कर 98.05 मिलियन टन हो जाएगी। कंपनी का लक्ष्य पहले घरेलू मांग को पूरा करना है, इसके बाद बची हुई अतिरिक्त क्षमता का उपयोग पेट्रोल और डीजल के निर्यात के लिए किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के सफल होने पर IOC के कुल राजस्व में निर्यात की हिस्सेदारी मौजूदा लगभग 5 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इससे भारत की ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक स्थिति और मजबूत होने के साथ विदेशी मुद्रा आय में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
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