Simran Mallick / Fri, Sep 11, 2026 / Post views : 3
रायपुर। नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रमों को लेकर छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड की ओर से मुस्लिम समाज के लोगों के लिए एक अपील सामने आई है। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने मुस्लिम समाज के लोगों से गरबा आयोजनों से दूरी बनाए रखने और गरबा की धार्मिक परंपरा व आस्था का सम्मान करने की अपील की है।
डॉ. सलीम राज ने कहा कि गरबा को केवल नृत्य का कार्यक्रम नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह धार्मिक परंपरा और आस्था से जुड़ा आयोजन है। ऐसे में समाज के लोगों को इसकी धार्मिक भावनाओं और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।
अनुमति लेकर शामिल होने की बात
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति गरबा कार्यक्रम में शामिल होना चाहता है, तो उसे आयोजन समिति से अनुमति लेकर वहां की वेशभूषा और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में आयोजकों की सहमति और कार्यक्रम की धार्मिक परंपराओं का पालन महत्वपूर्ण है।
डॉ. राज ने समाज के लोगों से गरबा आयोजनों को लेकर संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि गरबा को केवल मनोरंजन या डांस के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इसका संबंध धार्मिक आस्था और परंपरा से है।
आस्था और परंपरा के सम्मान पर जोर
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि अलग-अलग धार्मिक आयोजनों की अपनी परंपराएं और मान्यताएं होती हैं। इसलिए सभी लोगों को एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।
गौरतलब है कि नवरात्रि के दौरान छत्तीसगढ़ समेत देश के कई हिस्सों में बड़े स्तर पर गरबा और डांडिया कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे आयोजनों में प्रवेश और भागीदारी को लेकर स्थानीय आयोजक अपनी शर्तें तय कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड की ओर से सामने आई यह अपील मुस्लिम समाज के लोगों से संबंधित है; इसे राज्यभर में गरबा में मुस्लिमों के प्रवेश पर किसी सरकारी प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
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