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Hartalika Teej 2026 : सिर्फ श्रृंगार नहीं, लाल-हरे रंग और मेहंदी का भी है खास महत्व, जानें तीज की धार्मिक मान्यताएं

Simran Mallick / Mon, Sep 14, 2026 / Post views : 71

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नई दिल्ली। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष हरतालिका तीज का व्रत सोमवार, 14 सितंबर 2026 को रखा जा रहा है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना से व्रत रखती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा इस पर्व का मुख्य हिस्सा है।

लाल और हरे रंग का क्यों है महत्व?

हरतालिका तीज पर लाल और हरे रंग के कपड़े पहनने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं में लाल रंग को सुहाग, प्रेम और ऊर्जा से जोड़ा जाता है, जबकि हरा रंग हरियाली, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि महिलाएं तीज के दिन लाल-हरी चूड़ियां और अन्य श्रृंगार सामग्री भी धारण करती हैं।

मेहंदी को माना जाता है शुभ

तीज के अवसर पर हाथों में मेहंदी लगाने की भी परंपरा है। इसे सुहाग और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। महिलाएं मेहंदी, चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री के साथ पारंपरिक रूप से तैयार होती हैं।

शिव-पार्वती की पूजा और तीज व्रत कथा

हरतालिका तीज पर महिलाएं अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत रखती हैं। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा में माता पार्वती को सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां और अन्य श्रृंगार सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। इसके साथ हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनी जाती है। कई स्थानों पर महिलाएं रात में भजन-कीर्तन और जागरण भी करती हैं।

तीज पर इन बातों का रखें ध्यान

हरतालिका तीज को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में कई पारंपरिक मान्यताएं हैं। कुछ परिवारों में इस दिन बाल काटने से बचने की परंपरा है। वहीं कुछ स्थानों पर काले या सफेद कपड़े पहनने से भी परहेज किया जाता है। व्रत के दौरान क्रोध, विवाद और किसी का अपमान करने से बचने तथा पूजा-पाठ में मन लगाने को शुभ माना जाता है।

आस्था और सकारात्मकता का पर्व है हरतालिका तीज

हरतालिका तीज केवल व्रत और श्रृंगार तक सीमित पर्व नहीं है। यह भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति आस्था, दांपत्य जीवन की मंगलकामना और परिवार की खुशहाली से जुड़ा अवसर है। महिलाएं श्रद्धा के साथ शिव-पार्वती की आराधना कर सुखी और समृद्ध जीवन की कामना करती हैं।

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