खैरागढ़।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए संचालित महतारी वंदन योजना में खैरागढ़ जिले से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ग्राम मुढ़ीपार के एक पुरुष का आवेदन योजना में स्वीकृत हो गया और उसके बैंक खाते में लगातार 12 महीने तक हर माह ₹1000 की राशि जमा होती रही। मामला सामने आने के बाद विभागीय सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुरुष का आवेदन दो स्तरों पर हुआ सत्यापित
ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार हितग्राही तिलोक साहू का आवेदन पहले आंगनबाड़ी स्तर और फिर सुपरवाइजर स्तर पर भी सत्यापित किया गया। सबसे हैरानी की बात यह है कि आवेदन में हितग्राही और उसके पति—दोनों के नाम तिलोक साहू दर्ज थे। इसके बावजूद आवेदन स्वीकृत हो गया और भुगतान भी लगातार जारी रहा।
रिकॉर्ड और रिकवरी में भी दिखा अंतर
ऑनलाइन रिकॉर्ड में 12 माह तक भुगतान का उल्लेख है, जबकि एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना, खैरागढ़ द्वारा 3 जुलाई 2026 को बैंक को जारी पत्र में केवल ₹10,000 शासन के खाते में वापस जमा कराने के निर्देश दिए गए। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि 12 माह तक भुगतान हुआ तो वसूली केवल 10 माह की राशि की ही क्यों की गई।
विभागीय निगरानी पर उठे सवाल
मामले ने महतारी वंदन योजना की सत्यापन प्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जब आवेदन में स्पष्ट विसंगतियां थीं, तब भी वह दो स्तरों की जांच पार कर गया और एक वर्ष तक भुगतान जारी रहा। इससे विभागीय निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
अधिकारी ने क्या कहा?
जिला परियोजना अधिकारी प्रीत राम खुटेल ने बताया कि अपात्र हितग्राही से राशि की रिकवरी कर ली गई है। अन्य बिंदुओं पर उन्होंने रिकॉर्ड देखने के बाद जानकारी देने की बात कही।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह मामला सामने नहीं आता तो क्या भुगतान आगे भी जारी रहता? साथ ही, गलत आवेदन को सत्यापित करने और स्वीकृति देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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