Simran Mallick / Tue, Sep 22, 2026 / Post views : 33
नई दिल्ली। करम पर्व झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, प्रकृति के प्रति आस्था और सामाजिक एकजुटता का अद्भुत प्रतीक है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, परंपरा, संस्कृति और सामुदायिक जीवन के बीच गहरे संबंध को दर्शाने वाला जीवंत उत्सव है। यह बात सांसद एवं छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी श्री सुखदेव भगत ने करम पर्व के अवसर पर कही।
श्री भगत ने कहा कि करम पर्व हमें प्रकृति के संरक्षण, सामूहिक सहभागिता और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता है। आदिवासी समाज की जीवनशैली में प्रकृति केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन और आस्था का अभिन्न हिस्सा है। करम पर्व इसी भावना को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि करम पर्व के अवसर पर पूरा समाज मिल-जुलकर पूजा-अर्चना करता है, पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य के माध्यम से अपनी संस्कृति को जीवंत रखता है। यह पर्व सामाजिक समरसता, भाईचारे और सामुदायिक एकता को मजबूत करने का भी संदेश देता है।
सुखदेव भगत ने कहा कि बदलते समय में अपनी लोक परंपराओं, संस्कृति और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी को संरक्षित रखना हम सभी का दायित्व है। करम पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और आने वाली पीढ़ियों तक अपनी समृद्ध विरासत पहुंचाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने देशवासियों, विशेषकर झारखंड के लोगों को करम पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए सुख, शांति, समृद्धि और सामाजिक एकता की कामना की।
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