Simran Mallick / Wed, Jul 29, 2026 / Post views : 6
रायपुर।
छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आम नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से सार्वजनिक सूचना जारी कर झूठी एवं दुर्भावनापूर्ण शिकायतों से बचने तथा पुलिस को सत्य एवं सही जानकारी देने की अपील की गई है। पुलिस द्वारा जारी जागरूकता संदेश में भारतीय न्याय संहिता, 2023 के विभिन्न प्रासंगिक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि जानबूझकर झूठी सूचना देना, झूठे साक्ष्य तैयार करना अथवा किसी निर्दोष व्यक्ति को झूठे मामले में फंसाने का प्रयास करना दंडनीय अपराध हो सकता है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक व्यक्ति को पुलिस के समक्ष जाकर किसी अपराध की सूचना देने का अधिकार है और प्राप्त शिकायतों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाती है। हालांकि, किसी व्यक्ति को जानबूझकर झूठी सूचना नहीं देनी चाहिए और न ही झूठे साक्ष्य तैयार कर किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान या बदनाम करने का प्रयास करना चाहिए।
जागरूकता सूचना में बताया गया है कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 212 के तहत झूठी सूचना देने, धारा 216 के तहत झूठा शपथ-पत्र देने, धारा 217 के तहत लोक सेवक को झूठी सूचना देने तथा धारा 227, 228 एवं 229 के तहत झूठे साक्ष्य देने या गढ़ने जैसे कृत्यों पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके अलावा, अपराध के संबंध में झूठी सूचना देने तथा किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से झूठा आपराधिक आरोप लगाने पर भी संबंधित धाराओं के तहत दंड का प्रावधान है।
छत्तीसगढ़ पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अपराध की सूचना देते समय केवल सत्य एवं तथ्यात्मक जानकारी ही पुलिस को दें। झूठी शिकायत या झूठे आरोप के कारण न केवल निर्दोष व्यक्ति को मानसिक एवं सामाजिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, बल्कि शिकायतकर्ता स्वयं भी कानूनी कार्रवाई की जद में आ सकता है।
पुलिस का संदेश है—
“सत्य सूचना दें • कानून का सम्मान करें • झूठी शिकायत से बचें”
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