नई दिल्ली।
देश आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। तिरंगा फहराने के बाद दिए अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को नमन किया और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को केंद्र में रखा।
प्रधानमंत्री का इस बार का संदेश केवल उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने आने वाले वर्षों में भारत को किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, किन क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता जरूरी है और देश की युवा शक्ति किस तरह विकास की अगली कहानी लिख सकती है—इन मुद्दों पर विशेष जोर दिया।
2047 का लक्ष्य, आज से तैयारी पर जोर:
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के सामने अब केवल विकास करने का नहीं, बल्कि तेज गति से विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य है। इसके लिए अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा, उद्योग और मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों में देश की क्षमता को लगातार मजबूत करने की जरूरत है।
उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को केवल सरकारी योजनाओं से जोड़ने के बजाय देश के प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से जोड़ने का संदेश दिया।
‘सप्तधारा’ के जरिए विकास की दिशा:
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ‘सप्तधारा’ की चर्चा की। इसके माध्यम से विकास की अलग-अलग धाराओं को एक साथ आगे बढ़ाने की सोच सामने रखी गई।
इसका व्यापक संदेश यही रहा कि भारत को एक साथ कई मोर्चों पर अपनी ताकत बढ़ानी होगी—आर्थिक विकास, तकनीकी क्षमता, युवाओं की भागीदारी, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक क्षेत्रों में मजबूत स्थिति इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
युवाओं को विकास की सबसे बड़ी ताकत बताया:
प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं को भारत के भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में सामने रखा। उन्होंने युवाओं की नई सोच, नवाचार, तकनीकी कौशल और उद्यमिता को देश की प्रगति से जोड़ने पर जोर दिया।
2047 में भारत की तस्वीर कैसी होगी, इसमें आज के युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। ऐसे में प्रधानमंत्री का संदेश शिक्षा, कौशल, रोजगार और नई तकनीक के क्षेत्र में युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सेमीकंडक्टर से महत्वपूर्ण खनिज तक आत्मनिर्भरता पर जोर:
प्रधानमंत्री ने ऐसे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिलाया, जो आने वाले समय में किसी भी देश की आर्थिक और रणनीतिक ताकत तय करेंगे। इनमें महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और आधुनिक तकनीक प्रमुख हैं।
भारत यदि इन क्षेत्रों में अपनी निर्भरता कम करता है और घरेलू उत्पादन एवं तकनीकी क्षमता बढ़ाता है, तो इससे उद्योग, रोजगार और राष्ट्रीय सुरक्षा—तीनों को मजबूती मिल सकती है।
सिर्फ कच्चे संसाधन नहीं, वैल्यू एडिशन पर जोर:
भारत के पास प्राकृतिक संसाधन और बड़ा बाजार है, लेकिन प्रधानमंत्री के संदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि देश को केवल संसाधनों के इस्तेमाल तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
कच्चे माल से तैयार उत्पाद तक की पूरी श्रृंखला भारत में विकसित करना आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इससे देश में उत्पादन बढ़ने के साथ रोजगार और नए उद्योगों के अवसर भी बढ़ेंगे।
बाढ़ प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना:
प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं और बाढ़ से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने प्रभावित लोगों को सहायता और पुनर्वास के प्रयासों का भरोसा भी दिलाया।
यह संदेश ऐसे समय आया है जब देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है।
80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री का 13वां लगातार संबोधन,पुरा भाषण पढ़े:
स्वतंत्रता से विकसित भारत तक का सफर:
लाल किले से प्रधानमंत्री का संबोधन एक तरह से स्वतंत्रता के संघर्ष से विकसित भारत के संकल्प तक की यात्रा को सामने रखता है।
1947 में भारत ने राजनीतिक स्वतंत्रता हासिल की थी। अब 2047 तक भारत को आर्थिक रूप से मजबूत, तकनीकी रूप से सक्षम, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से इस लक्ष्य को केवल सरकार का कार्यक्रम न मानकर सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प बनाने का आह्वान किया।
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