Simran Mallick / Sat, Aug 29, 2026 / Post views : 7
काठमांडू: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। मध्य नेपाल के रसुवा समेत कई इलाकों में बाढ़ और अचानक बढ़े जलस्तर के बाद राहत एवं बचाव अभियान जारी है। अब तक 586 लोगों के शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी और हेलिकॉप्टर राहत कार्य में जुटे हुए हैं।
बाढ़ के कारण सड़क, पुल, बस्तियों और पनबिजली परियोजनाओं के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन की टीमें नदी किनारे और प्रभावित क्षेत्रों में लगातार लोगों की तलाश कर रही हैं।
भोटेकोशी नदी क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने एक बार फिर बाढ़ की आशंका जताई है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद लोगों और राहत-बचाव दलों को सतर्क रहने की अपील की है।
प्राधिकरण के अनुसार, जहां पहले अचानक बाढ़ आई थी, वहां अब कीचड़युक्त पानी का स्तर बढ़ रहा है। ऐसे में लोगों को खतरा महसूस होने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी गई है।
नेपाल पुलिस और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित कई जिलों में अब भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। इनमें नेपाली नागरिकों के अलावा विदेशी नागरिक और पर्यटक भी शामिल हैं।
अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। घायलों को काठमांडू समेत अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। राहत टीमों की ओर से दुर्गम इलाकों तक पहुंचने के लिए हेलिकॉप्टर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
बाढ़ के बाद कई इलाकों से लगातार शव बरामद होने के कारण अस्पतालों और मुर्दाघरों में जगह की कमी की स्थिति पैदा हो गई है। नदी के तेज बहाव में बहकर आए शव कई जिलों में बरामद किए जा रहे हैं।
राहत एवं बचाव दल नदी के किनारे और नदी के बहाव की दिशा में स्थित क्षेत्रों में तलाशी अभियान चला रहे हैं। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचकर लापता लोगों का पता लगाना है।
इस प्राकृतिक आपदा के बाद भारत की ओर से भी नेपाल को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। राहत सामग्री के साथ मेडिकल टीम और बचाव दल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
प्रभावित क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के प्रयास भी जारी हैं। बड़ी संख्या में भारतीयों के नेपाल के अलग-अलग हिस्सों में फंसे होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल में प्राकृतिक आपदा से पैदा हुए हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों ने आपदा राहत कोष में एक महीने का वेतन दान करने का फैसला किया है।
कैबिनेट ने वित्त मंत्रालय को बाढ़ प्रभावित लोगों और कारोबारियों के लिए राहत, रियायती वित्तीय सहायता और पुनर्वास पैकेज तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं।
नेपाल सरकार ने 29 अगस्त से होने वाली सभी परीक्षाओं को भी स्थगित करने का फैसला किया है।
नेपाल में बाढ़ के बीच चीन ने भी चौथे स्तर का आपदा अलर्ट जारी किया है। चीनी अधिकारियों के अनुसार, नेपाल से जुड़ी नदी प्रणाली के क्षेत्र में एक बड़ी अवरोधक झील बनने की सूचना है।
बताया गया है कि झील में बड़ी मात्रा में पानी जमा हो चुका है और आने वाले दिनों में जलस्तर बढ़ने की आशंका है। ऐसे में झील के टूटने की स्थिति में निचले इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
नेपाल और चीन के अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
लगातार बदलते मौसम, बढ़ता जलस्तर और क्षतिग्रस्त सड़क एवं पुल राहत अभियान में बड़ी चुनौती बने हुए हैं। सुरक्षाबल और बचाव दल प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने और लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं।
नेपाल में इस आपदा के बाद परिजन अब भी अपने लापता लोगों के सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और लापता लोगों की तलाश तेज करना है।
नोट: मृतकों और लापता लोगों की संख्या राहत एवं बचाव अभियान के दौरान बदल सकती है। अंतिम आंकड़े संबंधित नेपाली अधिकारियों की आधिकारिक पुष्टि के आधार पर ही माने जाने चाहिए।
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