नई दिल्ली: प्याज, चीनी और दाल के बाद अब अंडों की कीमतों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। सर्दियों में अंडों की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। ऐसे में अगर पोल्ट्री फीड की लागत ऊंची बनी रहती है तो आने वाले महीनों में अंडों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, हर अंडे के 20-25 रुपये तक पहुंचने की बात को सामान्य अंडों के लिए नहीं समझना चाहिए। उद्योग से जुड़े अनुमानों में इतनी ऊंची कीमत मुख्य रूप से प्रीमियम, ब्रांडेड या स्पेशलिटी अंडों के लिए बताई जा रही है। सामान्य अंडों की कीमत इससे काफी अलग रह सकती है।
नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल फार्म स्तर पर अंडे की कीमत करीब 7 रुपये प्रति पीस है, जबकि कई बाजारों में खुदरा कीमत लगभग 8.50 से 9 रुपये के बीच है।
पिछले एक साल में अंडों की कीमतों में करीब 35-40 फीसदी तक बढ़ोतरी का दावा किया गया है। हालांकि, वास्तविक खुदरा कीमत शहर, राज्य, बाजार और अंडे की किस्म के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
अंडे की कीमत तय होने में पोल्ट्री फीड की लागत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मुर्गियों के चारे में मक्का और सोयाबीन प्रमुख कच्चे माल में शामिल हैं। इनके दाम बढ़ने पर अंडे के उत्पादन की लागत भी बढ़ जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार, पोल्ट्री फीड में मक्के की हिस्सेदारी करीब 60-70 फीसदी तक हो सकती है। ऐसे में मक्के की कीमत में होने वाला बदलाव पोल्ट्री किसानों की लागत पर सीधा असर डाल सकता है।
मक्के की कीमतों पर इथेनॉल उद्योग की बढ़ती मांग का भी असर पड़ने की बात कही जा रही है। भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा दिए जाने के बाद डिस्टिलरीज में मक्के की मांग बढ़ी है।
उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में मक्के की कीमत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे पोल्ट्री सेक्टर के लिए फीड की लागत बढ़ी है और इसका असर उत्पादन लागत पर पड़ रहा है।
मक्के के अलावा सोयाबीन मील भी पोल्ट्री फीड में प्रोटीन के प्रमुख स्रोतों में शामिल है। इसकी कीमतों में तेजी आने पर किसानों की लागत और बढ़ सकती है।
अगर मक्का और सोयाबीन दोनों महंगे बने रहते हैं और सर्दियों में अंडों की मांग बढ़ती है, तो बाजार में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल इसे सामान्य अंडे की तय कीमत मानना सही नहीं होगा। 20-25 रुपये प्रति अंडे का अनुमान मुख्य रूप से प्रीमियम, ब्रांडेड और स्पेशलिटी अंडों से जोड़ा जा रहा है।
सामान्य अंडे की कीमत कई कारकों पर निर्भर करेगी, जिसमें पोल्ट्री फीड की लागत, उत्पादन, मौसम, मांग और स्थानीय बाजार की स्थिति शामिल है।
भारत में सर्दियों के दौरान अंडों की खपत बढ़ने की प्रवृत्ति देखी जाती है। यदि इस दौरान मांग बढ़ती है और पोल्ट्री फीड की लागत कम नहीं होती, तो कीमतों में तेजी का दबाव बना रह सकता है।
हालांकि, आने वाले महीनों में वास्तविक कीमत क्या होगी, यह उत्पादन और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा। इसलिए 20-25 रुपये प्रति अंडे की कीमत को लेकर अभी से यह कहना कि हर जगह सामान्य अंडा इतना महंगा हो जाएगा, सही नहीं होगा।
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