Simran Mallick / Thu, Aug 27, 2026 / Post views : 6
नई दिल्ली: यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ 26 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म में यश के साथ कियारा आडवाणी, नयनतारा, तारा सुतारिया, हुमा कुरैशी और रुक्मिणी वसंत अहम भूमिकाओं में नजर आ रही हैं। फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है।
काफी समय से चर्चा में रही इस फिल्म से यश के फैंस को काफी उम्मीदें थीं। खासकर KGF के बाद यश की एक्शन इमेज को देखते हुए माना जा रहा था कि यह फिल्म भी बड़े पर्दे पर शानदार अनुभव देगी। हालांकि, फिल्म देखने के बाद कहानी और प्रस्तुति को लेकर निराशा हाथ लगती है।
फिल्म की शुरुआत एक मां और उसके बेटे की कहानी से होती है। इसके बाद कहानी 1947 के गोवा में पहुंचती है, जहां गैंगवार और अपराध की दुनिया के बीच यश का किरदार अपनी बहन के साथ प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करता है।
फिल्म की कहानी अलग-अलग समय और घटनाओं के बीच आगे बढ़ती है। इसमें गैंगस्टर ड्रामा, एक्शन, पारिवारिक रिश्ते और कई किरदारों को जोड़ने की कोशिश की गई है। कहानी आगे बढ़ते हुए 1967 तक पहुंचती है।
समस्या यह है कि फिल्म इतने सारे ट्रैक और किरदारों के बीच उलझ जाती है कि दर्शक के लिए मुख्य कहानी को समझना मुश्किल हो जाता है। खासकर क्लाइमेक्स तक पहुंचते-पहुंचते कहानी का प्रभाव काफी कम हो जाता है।
गीतू मोहनदास इससे पहले अपनी अलग तरह की कहानी और मजबूत निर्देशन के लिए जानी जाती हैं। लेकिन ‘टॉक्सिक’ में उनका निर्देशन उतना प्रभावी नजर नहीं आता।
फिल्म में बड़े स्तर का एक्शन और शानदार विजुअल्स दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन कहानी और किरदारों का विकास उतना मजबूत नहीं है। कई जगह ऐसा लगता है कि फिल्म अपनी गति और दिशा दोनों खो देती है।
तीन घंटे से ज्यादा की लंबी अवधि भी फिल्म के लिए परेशानी बनती है। कुछ दृश्यों को छोटा किया जाता तो फिल्म ज्यादा प्रभावी हो सकती थी।
यश फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस दमदार है और एक्शन दृश्यों में उनका अंदाज उनके प्रशंसकों को पसंद आ सकता है।
हालांकि, मजबूत किरदार और प्रभावी कहानी की कमी के कारण यश की स्टार पावर भी फिल्म को पूरी तरह संभाल नहीं पाती। कई जगह ऐसा महसूस होता है कि फिल्म कहानी के बजाय मुख्य अभिनेता की लोकप्रियता पर ज्यादा निर्भर है।
नयनतारा अपने किरदार में प्रभाव छोड़ती हैं और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस मजबूत नजर आती है। वहीं कियारा आडवाणी को मिला किरदार उतना प्रभावशाली नहीं है।
तारा सुतारिया भी अपने रोल में खास असर नहीं छोड़ पातीं। हुमा कुरैशी का प्रदर्शन ठीक-ठाक है, जबकि रुक्मिणी वसंत के किरदार को भी पर्याप्त गहराई नहीं दी गई है।
फिल्म में कई बड़े कलाकार मौजूद हैं, लेकिन सभी किरदारों को कहानी में सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया गया है।
‘टॉक्सिक’ में एक्शन और बड़े पैमाने पर तैयार किए गए दृश्य फिल्म की खासियत हैं। यश के एक्शन सीक्वेंस प्रभावशाली नजर आते हैं।
लेकिन केवल एक्शन और स्टार पावर के सहारे फिल्म को लंबे समय तक बांधे रखना मुश्किल साबित होता है। कमजोर स्क्रीनप्ले और धीमी कहानी के कारण कई हिस्से खिंचे हुए महसूस होते हैं।
फिल्म का संगीत भी कहानी के प्रभाव को बढ़ाने में ज्यादा सफल नहीं हो पाता। वहीं एडिटिंग फिल्म की बड़ी कमजोरियों में शामिल है।
कई घटनाओं के बीच ट्रांजिशन सहज नहीं लगता और लंबी अवधि दर्शकों के धैर्य की परीक्षा लेती है।
अगर आप यश के बड़े फैन हैं और उन्हें बड़े पर्दे पर एक्शन करते देखना पसंद करते हैं, तो फिल्म आपके लिए कुछ खास सीक्वेंस की वजह से देखने लायक हो सकती है। लेकिन अगर आप मजबूत कहानी, बेहतरीन स्क्रीनप्ले और संतुलित निर्देशन वाली फिल्म की उम्मीद कर रहे हैं, तो ‘टॉक्सिक’ निराश कर सकती है।
कुल मिलाकर, फिल्म में बड़े सितारे, भव्य एक्शन और शानदार स्क्रीन प्रेजेंस तो है, लेकिन कमजोर कहानी, असंगत स्क्रीनप्ले और लंबी अवधि इसकी सबसे बड़ी कमियां बन जाती हैं।
⭐ 1.5/5
डायरेक्टर: गीतू मोहनदास
मुख्य कलाकार: यश, कियारा आडवाणी, नयनतारा, तारा सुतारिया, हुमा कुरैशी, रुक्मिणी वसंत, अक्षय ओबेरॉय
रिलीज डेट: 26 अगस्त 2026
भाषाएं: कन्नड़, हिंदी, तमिल, तेलुगु और अंग्रेजी
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