Simran Mallick / Sat, Aug 29, 2026 / Post views : 6
Kajri Teej 2026: हिंदू धर्म में तीज व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। कजरी तीज भी प्रमुख तीज पर्वों में शामिल है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं। कई जगहों पर कजरी तीज के दिन नीमड़ी माता की पूजा करने की भी परंपरा है।
इस वर्ष कजरी तीज की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है। तृतीया तिथि 30 अगस्त से शुरू होकर 31 अगस्त तक रहेगी। ऐसे में पंचांग के अनुसार उदया तिथि को आधार मानते हुए कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।
पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 30 अगस्त 2026 को सुबह 09:38 बजे शुरू होगी और 31 अगस्त 2026 को सुबह 08:52 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त को रखा जाएगा।
इस दिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं सोलह श्रृंगार कर तीज उत्सव मनाती हैं और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं।
कजरी तीज के दिन धार्मिक कार्यों और पूजा के लिए शुभ समय इस प्रकार है—
तृतीया तिथि प्रारंभ: 30 अगस्त 2026, सुबह 09:38 बजे
तृतीया तिथि समाप्त: 31 अगस्त 2026, सुबह 08:52 बजे
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:29 बजे से 05:14 बजे तक
पूजा का शुभ समय: शाम 06:44 बजे से रात 07:51 बजे तक
ध्यान रखें कि पूजा और चंद्र दर्शन के स्थानीय समय में स्थान के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है।
कजरी तीज का व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी वजह से तीज के व्रत को पति-पत्नी के रिश्ते, प्रेम और वैवाहिक सुख से जोड़कर देखा जाता है।
कजरी तीज पर कई क्षेत्रों में नीमड़ी माता की पूजा करने की परंपरा है। इसके लिए नीम की टहनी या प्रतीकात्मक रूप को स्थापित कर रोली, अक्षत, फूल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित की जाती है।
महिलाएं पूजा के दौरान परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं। स्थानीय परंपराओं के अनुसार पूजा की विधि में कुछ अंतर हो सकता है।
कजरी तीज के व्रत में चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। रात में चंद्र दर्शन के बाद चंद्रमा को जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रत का पारण किया जाता है।
कई स्थानों पर महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद परिवार के साथ पूजा करती हैं और पति के अच्छे स्वास्थ्य व सुखी जीवन की कामना करती हैं।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई तिथि, मुहूर्त और धार्मिक मान्यताएं पंचांग एवं परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांगों के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।
Tags :
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन