Simran Mallick / Fri, Oct 9, 2026 / Post views : 4
बिजनेस: देश में बढ़ती महंगाई का असर अब आम आदमी की रसोई पर भी दिखाई देने लगा है। प्याज, खाद्य तेल, चावल और LPG गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से घर में खाना बनाना पहले के मुकाबले महंगा हो गया है। क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में शाकाहारी थाली की लागत पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 10 प्रतिशत बढ़ गई। वहीं, मांसाहारी थाली की लागत में भी सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे घरेलू बजट संभालने वाले परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
क्रिसिल की मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में घर पर एक शाकाहारी थाली तैयार करने की औसत लागत बढ़कर 30.80 रुपये हो गई, जबकि सितंबर 2025 में इसके लिए 28.10 रुपये खर्च करने पड़ते थे। इस तरह एक साल में शाकाहारी थाली की लागत में करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
वहीं, मांसाहारी थाली की औसत लागत सालाना आधार पर लगभग 6 प्रतिशत बढ़कर 59.50 रुपये पहुंच गई, जो पिछले साल सितंबर में 56 रुपये थी। अगस्त 2026 की तुलना में भी सितंबर में शाकाहारी थाली करीब 4 प्रतिशत और मांसाहारी थाली लगभग 3 प्रतिशत महंगी हुई।
शाकाहारी थाली की लागत बढ़ने की प्रमुख वजह प्याज की कीमतों में भारी बढ़ोतरी बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में प्याज का भाव सालाना आधार पर करीब 89 प्रतिशत बढ़कर 53 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। पिछले साल सितंबर में प्याज लगभग 28 रुपये प्रति किलो मिल रहा था।
रिपोर्ट में प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे रबी फसल के सीमित भंडार और उत्पादन में गिरावट को प्रमुख कारण बताया गया है। इसके अलावा, जून में सामान्य औसत से कम बारिश होने के कारण खरीफ फसल की बुवाई प्रभावित हुई और नई फसल की बाजार में आवक में देरी हुई। आपूर्ति कम होने से कीमतों पर दबाव बढ़ा।
रसोई का बजट बढ़ने की वजह केवल प्याज नहीं है। क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में खाद्य तेल की कीमतें पिछले साल की तुलना में करीब 12 प्रतिशत, चावल की कीमतें 8 प्रतिशत और LPG गैस की कीमतें 10 प्रतिशत बढ़ीं।
खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं और पाम ऑयल उत्पादन पर अल नीनो के संभावित प्रभाव को जिम्मेदार बताया गया है। वहीं, धान के रकबे और पैदावार को लेकर बनी आशंकाओं से चावल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
इन जरूरी वस्तुओं के महंगे होने से परिवारों को रोजमर्रा के खर्च में अधिक पैसे लगाने पड़ रहे हैं। खासकर सीमित आय वाले परिवारों के लिए खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें घरेलू बजट को प्रभावित कर सकती हैं।
क्रिसिल के अनुमान के अनुसार, अक्टूबर की शुरुआत में त्योहारों की मांग और प्याज की सीमित आपूर्ति के कारण कीमतें ऊंची रह सकती हैं। हालांकि, महीने के आखिरी हिस्से में खरीफ की नई फसल बाजार में पहुंचने से प्याज की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है।
फिलहाल खाद्य पदार्थों और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आम परिवारों का खर्च बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में नई फसल की आवक, बाजार में आपूर्ति और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में होने वाले बदलाव से यह तय होगा कि घरेलू बजट को कितनी राहत मिलती है।
Tags :
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन