नई दिल्ली: रक्षाबंधन से पहले प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान आम लोगों के लिए केंद्र सरकार ने राहत की तैयारी शुरू कर दी है। प्याज की कीमतों में मौसमी तेजी को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने नासिक से देश के बड़े खपत केंद्रों तक ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए बफर स्टॉक भेजना शुरू कर दिया है।
सरकार की ओर से एनसीसीएफ और नाफेड जैसी एजेंसियों के माध्यम से प्याज की खुदरा बिक्री 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से करने की योजना है। शुरुआती चरण में पांच प्रमुख शहरों में इसकी आपूर्ति की जाएगी।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 24 अगस्त 2026 को प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 43.53 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। पिछले साल इसी अवधि में यह कीमत 27.37 रुपये प्रति किलो थी।
वहीं प्याज की औसत थोक कीमत भी बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलो हो गई है, जबकि एक साल पहले यह 21.23 रुपये प्रति किलो थी।
प्रमुख शहरों में भी प्याज की कीमतों में तेजी देखी गई। सोमवार को दिल्ली में प्याज करीब 55 रुपये, चेन्नई में 60 रुपये और कोलकाता में 53 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा था।
केंद्र सरकार ने शुरुआत में चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी को प्याज की आपूर्ति के लिए चुना है। बाजार की जरूरत के अनुसार आगे दूसरे शहरों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है।
नासिक में रखे गए बफर स्टॉक को रेलवे रैक के जरिए बड़ी मात्रा में इन शहरों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके बाद थोक और खुदरा बाजारों में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
सरकार का लक्ष्य बफर स्टॉक के जरिए बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों पर नियंत्रण रखना है। इसके लिए NCCF और NAFED के माध्यम से प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से खुदरा बाजार में उपलब्ध कराने की योजना है।
सरकार बाजार की कीमतों पर लगातार नजर रख रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त स्टॉक भी बाजार में उतारा जा सके।
केंद्र के पास चालू वर्ष के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक उपलब्ध बताया गया है। इस स्टॉक का इस्तेमाल बाजार में आपूर्ति कम होने या कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की स्थिति में किया जाता है।
बफर स्टॉक का उद्देश्य मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना तथा कीमतों में अचानक होने वाली तेजी को नियंत्रित करना है।
सरकार के मुताबिक अगस्त और सितंबर के दौरान प्याज की कीमतों में मौसमी तेजी देखने को मिलती है। इसके पीछे त्योहारी मांग, मौसम संबंधी व्यवधान, सप्लाई चेन में बदलाव और मांग में उतार-चढ़ाव जैसे कारण हो सकते हैं।
इसी वजह से सरकार इस अवधि में बफर स्टॉक को प्रमुख मंडियों और बड़े खपत केंद्रों तक पहुंचाकर बाजार में प्याज की उपलब्धता बनाए रखने की रणनीति अपनाती है।
बड़े पैमाने पर प्याज की ढुलाई के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ पहल को 2024-25 में शुरू किया गया था। इसके बाद रेलवे के जरिए प्याज की ढुलाई का दायरा बढ़ाया गया।
वर्ष 2024-25 में करीब 12,000 टन प्याज लेकर 14 रेल रैक पांच शहरों तक भेजे गए थे। वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 86 रेल रैक हो गई, जिनके माध्यम से लगभग 88,000 टन प्याज 16 बड़े शहरों तक पहुंचाया गया।
अब एक बार फिर सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने के लिए इस व्यवस्था का इस्तेमाल शुरू किया है। आने वाले दिनों में बाजार में प्याज की सप्लाई बढ़ने से कीमतों पर कितना असर पड़ता है, इस पर नजर रहेगी।
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