Rashtriya Seva Johar / Tue, Oct 20, 2026 / Post views : 44
नागपुर, 20 अक्टूबर।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार को नागपुर में आयोजित विजयादशमी समारोह को संबोधित करते हुए सत्ता परिवर्तन, सामाजिक आंदोलनों और देश की एकता जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे। संघ के शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि केवल सत्ता बदलने से परिस्थितियां अपने आप नहीं बदल जातीं।
आंदोलनों का उद्देश्य समाधान होना चाहिए:
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन होना स्वाभाविक है, लेकिन उनका उद्देश्य जनहित में समाधान तलाशना होना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि आंदोलनों, प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक गतिविधियों के कारण समाज में द्वेष, कटुता या विभाजन की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।
विदेशों में हुए घटनाक्रमों का किया उल्लेख:
आरएसएस प्रमुख ने फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल में हुए हालिया घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए सत्ता परिवर्तन की राजनीति पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों में वास्तविक सुधार के लिए समाज को समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रयास करना चाहिए। उन्होंने भारत को कमजोर करने की कोशिशों का भी दावा किया। ये उनके संबोधन में व्यक्त विचार और आरोप थे।
संविधान और सामाजिक सद्भाव पर जोर:
भागवत ने कहा कि भावनाएं कितनी भी तीव्र क्यों न हों, आंदोलनों और सार्वजनिक व्यवहार में संविधान, कानून तथा सामाजिक मर्यादाओं का पालन आवश्यक है। उन्होंने राजनीतिक नेताओं, आंदोलन करने वाले समूहों और कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले प्रशासन से ऐसे आचरण की अपेक्षा जताई, जिससे समाज की एकता बनी रहे।
शताब्दी वर्ष के समापन पर आयोजित हुआ समारोह:
नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित विजयादशमी समारोह में मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया और संबोधन दिया। कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सहित अन्य अतिथि भी उपस्थित रहे। इस वर्ष का आयोजन संघ के 101वें स्थापना दिवस और शताब्दी वर्ष के समापन से जुड़ा रहा।
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