Simran Mallick / Tue, Sep 22, 2026 / Post views : 8
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले UPI भुगतान पर लागू होने वाले नए Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा।
नई व्यवस्था में व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान पर कोई MDR नहीं लगेगा। ₹2,000 तक के P2M भुगतान और जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे व्यापारियों के लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे। वित्त मंत्रालय के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M UPI लेनदेन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी के भुगतान इकोसिस्टम में लगाया जाता है। नए ढांचे के तहत ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा P2M UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR निर्धारित किया गया है। उदाहरण के तौर पर ₹10,000 के पात्र लेनदेन पर MDR ₹40 होगा। ₹75,000 के बाद शुल्क ₹300 पर कैप हो जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है और इसे ग्राहक से वसूलने की अनुमति नहीं होगी। यह राशि भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रदाताओं जैसे इकोसिस्टम के हिस्सेदारों के बीच वितरित होगी।

नए नियम को लेकर कुछ व्यापारी संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि कम मार्जिन वाले कारोबार में MDR की अतिरिक्त लागत भी महत्वपूर्ण हो सकती है। कुछ उद्योग संगठनों ने आशंका जताई है कि व्यापारी शुल्क खुद वहन करने या डिजिटल भुगतान के बजाय नकद भुगतान को प्राथमिकता देने पर विचार कर सकते हैं। कुछ कारोबारी संगठन यह भी चिंता जता रहे हैं कि लागत अंततः कीमतों या भुगतान के तरीके को प्रभावित कर सकती है।
हालांकि, MDR को ग्राहक से सीधे वसूलने की अनुमति नहीं होने के कारण नियम का वास्तविक बाजार प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि व्यापारी और भुगतान इकोसिस्टम नई व्यवस्था को व्यवहार में किस तरह लागू करते हैं।
UPI अब रोजमर्रा के कारोबार का बड़ा हिस्सा बन चुका है। ऐसे में ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यापारी भुगतान पर MDR की व्यवस्था को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। विपक्षी दल इसे जनता और व्यापारियों की लागत से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार इसे UPI इकोसिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने की व्यवस्था के रूप में पेश कर रही है।
इस बहस में एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि MDR और उपभोक्ता से सीधे लिया जाने वाला UPI चार्ज एक ही चीज नहीं हैं। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार शुल्क व्यापारी पक्ष पर लागू है और ग्राहक पर इसे डालने की अनुमति नहीं है। इसलिए इसका राजनीतिक और आर्थिक असर काफी हद तक 15 अक्टूबर के बाद बाजार में इसके वास्तविक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले UPI MDR का मुद्दा खासतौर पर उन बाजारों में चर्चा का विषय बन सकता है जहां बड़े डिजिटल भुगतान नियमित रूप से होते हैं। व्यापारी इसे अपनी लागत के नजरिए से देखेंगे, जबकि उपभोक्ताओं के लिए अहम सवाल यह होगा कि भुगतान करते समय उनसे अतिरिक्त राशि तो नहीं ली जा रही।
सरकार के लिए नए नियम की शर्तों और छूट को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा, वहीं व्यापारी संगठनों की प्रतिक्रिया और बाजार में नियम के पालन पर भी नजर रहेगी। इस तरह UPI MDR का मुद्दा आने वाले समय में आर्थिक नियम के साथ-साथ राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बना रह सकता है।
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