Rashtriya Seva Johar / Mon, Aug 17, 2026 / Post views : 24
नई दिल्ली।
18 अगस्त 2026, मंगलवार को स्वाति नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। पंचांग गणना के अनुसार स्वाति नक्षत्र 18 अगस्त की सुबह 4 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर 19 अगस्त की सुबह 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।
हिंदू पंचांग और ज्योतिषीय परंपराओं में स्वाति को महत्वपूर्ण नक्षत्र माना गया है। 18 अगस्त को शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और स्वाति नक्षत्र का संयोग रहेगा। पंचांग स्रोतों में इस दिन चंद्रमा के तुला राशि में रहने का भी उल्लेख है।
स्वाति नक्षत्र का समय:
- स्वाति नक्षत्र प्रारंभ: 18 अगस्त, सुबह 4:58 बजे
- स्वाति नक्षत्र समाप्त: 19 अगस्त, सुबह 6:46 बजे
- 18 अगस्त का वार: मंगलवार
- तिथि: शुक्ल पक्ष षष्ठी
- चंद्र राशि: तुला
पंचांग की गणना स्थान के अनुसार बदल सकती है, इसलिए रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग या अन्य शहरों में मुहूर्त के समय में कुछ मिनट का अंतर संभव है।
बारिश के पानी को लेकर क्या है मान्यता?
लोक परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं में स्वाति नक्षत्र और वर्षा जल को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध मान्यता यह है कि स्वाति नक्षत्र के दौरान गिरने वाली वर्षा की बूंद को सीप में गिरने पर मोती बनने से जोड़ा जाता है। हालांकि यह धार्मिक-लोकमान्यता है, इसे वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
इसी तरह कई स्थानों पर स्वाति नक्षत्र के दौरान हुई वर्षा को विशेष मानकर उसके जल को धार्मिक कार्यों में उपयोग करने की परंपरा भी देखने को मिलती है।
बारिश हो तो क्या करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान वर्षा होने पर लोग भगवान का स्मरण, पूजा-पाठ और दान-पुण्य जैसे कार्य कर सकते हैं। वर्षा जल को स्वच्छ पात्र में एकत्र कर धार्मिक उपयोग के लिए रखने की परंपरा भी कुछ परिवारों में है।
हालांकि बारिश के पानी को सीधे पीने की सलाह नहीं दी जाती, क्योंकि खुले वातावरण में गिरने वाला पानी धूल, प्रदूषण और अन्य अशुद्धियों के संपर्क में आ सकता है। पीने के लिए पानी को उचित तरीके से साफ और सुरक्षित करना जरूरी है।
स्वाति नक्षत्र में बताए जाने वाले उपाय:
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है। भगवान शिव, विष्णु या अपने इष्टदेव का स्मरण और पूजा भी श्रद्धा के अनुसार की जा सकती है।
वर्षा होने पर प्रकृति और जल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना, जल की बर्बादी रोकना और पौधों की देखभाल करना भी इस अवसर को सकारात्मक रूप से मनाने का अच्छा तरीका हो सकता है।
जरूरी बात
स्वाति नक्षत्र, वर्षा जल और उससे जुड़े उपाय धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके वैज्ञानिक प्रमाण होने का दावा नहीं किया जाना चाहिए। किसी भी उपाय को श्रद्धा और परंपरा के रूप में ही लें।
नोट: 18 अगस्त को स्वाति नक्षत्र का समय पंचांग स्रोतों में लगभग 4:58 बजे सुबह से 19 अगस्त सुबह 6:46 बजे तक दिया गया है। अलग-अलग शहरों और पंचांग पद्धतियों के कारण समय में मामूली अंतर हो सकता है।
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Swati nakshatra
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