नई दिल्ली/रायपुर।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित हसदेव अरण्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। मामला सरगुजा जिले के घाटबर्रा गांव के ग्रामीणों के सामुदायिक वन अधिकारों और परसा ईस्ट एवं केते बासेन (PEKB) कोयला ब्लॉक में खनन से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश 24 अगस्त 2026 को सुनवाई के दौरान दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति (HABSS) और छह अन्य लोगों की याचिका पर केंद्र सरकार, छत्तीसगढ़ सरकार, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RRVUNL) तथा सरगुजा की जिला स्तरीय वन अधिकार समिति (DLC) को नोटिस जारी किया। याचिका में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 21 अप्रैल 2026 के फैसले को चुनौती दी गई है।
क्या है पूरा मामला?:
घाटबर्रा गांव के ग्रामीणों को वन अधिकार कानून, 2006 के तहत सामुदायिक वन अधिकार दिए गए थे। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन अधिकारों को बाद में रद्द कर दिया गया और PEKB कोयला ब्लॉक में दूसरे चरण के खनन के लिए आगे की मंजूरियां दी गईं। उनका कहना है कि सामुदायिक वन अधिकारों को समाप्त करने और जंगल की जमीन को खनन के लिए इस्तेमाल करने की प्रक्रिया में वन अधिकार कानून तथा ग्राम सभा से संबंधित अनिवार्य प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
हाईकोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती:
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 21 अप्रैल 2026 को हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति की अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद समिति और अन्य याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अब शीर्ष अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर मामले पर जवाब मांगा है।
खनन पर फिलहाल रोक नहीं:
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का एक अहम पहलू यह है कि नोटिस जारी होने से PEKB कोयला ब्लॉक में चल रही मौजूदा खनन गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि सामुदायिक वन अधिकारों से जुड़े कानूनी सवालों की जांच के दौरान वर्तमान खनन संचालन पर इसका तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
आगे क्या होगा?:
अब केंद्र सरकार, छत्तीसगढ़ सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत यह जांच करेगी कि घाटबर्रा क्षेत्र में सामुदायिक वन अधिकारों की कानूनी स्थिति क्या है और यदि अधिकार अस्तित्व में पाए जाते हैं तो उन्हें लागू कराने के लिए क्या कानूनी उपाय किए जा सकते हैं।
Tags :
Chhattisgarh
Suprime court
Hasdev aaranya
Central Government
State government
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन