Simran Mallick / Tue, Aug 25, 2026 / Post views : 1
नई दिल्ली: रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी बनाए रखना बड़ी जरूरत होती है। नौकरी खत्म होने के बाद पेंशन या दूसरी आय के अलावा सुरक्षित निवेश से मिलने वाला ब्याज आर्थिक सहारा दे सकता है। ऐसे निवेशकों के लिए सरकार की सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम (SCSS) एक विकल्प है।
जुलाई से सितंबर 2026 तिमाही के लिए SCSS की ब्याज दर 8.2 प्रतिशत सालाना है। इस दर पर यदि कोई पात्र निवेशक करीब 12.20 लाख रुपये जमा करता है, तो सालाना लगभग 1 लाख रुपये ब्याज बन सकता है। इसका तिमाही भुगतान करीब 25,010 रुपये बैठता है।
8.2 प्रतिशत सालाना ब्याज दर के हिसाब से 12.20 लाख रुपये की जमा राशि पर सालभर में लगभग ₹1,00,040 ब्याज बनता है।
यानी चार तिमाहियों में करीब:
निवेश: ₹12.20 लाख
ब्याज दर: 8.2% सालाना
सालाना ब्याज: लगभग ₹1,00,040
तिमाही ब्याज: लगभग ₹25,010
5 साल में कुल ब्याज: करीब ₹5,00,200*
मूलधन: ₹12.20 लाख*
यह अनुमान इस धारणा पर है कि पूरी अवधि में ब्याज दर समान रहती है और ब्याज को खाते में जमा रहने के बजाय निकाल लिया जाता है। वास्तविक भुगतान और नियम लागू प्रावधानों के अनुसार होंगे।
SCSS में ब्याज की गणना तिमाही आधार पर होती है। ब्याज 31 मार्च, 30 जून, 30 सितंबर और 31 दिसंबर को देय होता है और भुगतान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है।
इस वजह से यह योजना उन रिटायर्ड लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जिन्हें पेंशन के अलावा नियमित नकदी प्रवाह की जरूरत है।
आम तौर पर 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के व्यक्ति इस योजना में निवेश कर सकते हैं। कुछ निर्धारित शर्तों के तहत 55 से 60 वर्ष की आयु के सेवानिवृत्त कर्मचारी और 50 से 60 वर्ष की आयु के सेवानिवृत्त रक्षा कर्मचारी भी पात्र हो सकते हैं।
SCSS में न्यूनतम निवेश ₹1,000 से शुरू होता है और अधिकतम कुल निवेश सीमा ₹30 लाख है। खाता व्यक्तिगत रूप से या पति-पत्नी के साथ संयुक्त रूप से खोला जा सकता है।
योजना की शुरुआती अवधि 5 वर्ष होती है। नियमों के तहत इसे आगे बढ़ाने का विकल्प भी उपलब्ध है।
SCSS से मिलने वाला ब्याज आपकी ग्रॉस इनकम का हिस्सा होता है और उस पर लागू आयकर नियमों के अनुसार कर देनदारी बन सकती है। पात्रता और निर्धारित सीमा के अनुसार ब्याज पर TDS भी लागू हो सकता है।
इसलिए ₹25,010 की तिमाही ब्याज राशि को सीधे हाथ में मिलने वाली अंतिम रकम नहीं मानना चाहिए। वास्तविक रकम निवेशक की आय और लागू टैक्स नियमों पर निर्भर करेगी।
SCSS की ब्याज दर सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित की जाती है। इसलिए भविष्य में नई जमा या विस्तार के समय लागू ब्याज दर अलग हो सकती है। निवेश करने से पहले मौजूदा सरकारी नियम, ब्याज दर और टैक्स प्रावधानों की जांच करना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य वित्तीय जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश करने से पहले लागू सरकारी नियमों और अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार उचित सलाह जरूर लें।
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