Rashtriya Seva Johar / Tue, Aug 4, 2026 / Post views : 38
नई दिल्ली। मानसून की बारिश जहां गर्मी से राहत देती है, वहीं जोड़ों के दर्द से जूझ रहे लोगों की परेशानी बढ़ा देती है। घुटनों, कमर, कंधों और अन्य जोड़ों में दर्द व अकड़न की शिकायत इस मौसम में आम हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल लोगों का भ्रम नहीं, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी मौजूद हैं। नेशनल बोन एंड ज्वाइंट डे के अवसर पर डॉक्टरों ने लोगों को हड्डियों और जोड़ों की सेहत को लेकर जागरूक रहने की सलाह दी है।
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के मौसम में बैरोमेट्रिक प्रेशर (वायुमंडलीय दबाव) कम हो जाता है। दबाव में कमी आने से जोड़ों के आसपास के टिश्यू पर असर पड़ता है। जिन लोगों को पहले से गठिया या जोड़ों में सूजन की समस्या होती है, उनमें दर्द महसूस कराने वाली नसें अधिक संवेदनशील हो जाती हैं। यही वजह है कि कई लोगों को बारिश शुरू होने से पहले ही दर्द और भारीपन महसूस होने लगता है।
मानसून के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से मांसपेशियां और लिगामेंट अधिक कड़े महसूस होने लगते हैं। इससे जोड़ों की लचक कम हो जाती है और चलने-फिरने में दिक्कत होती है। सुबह उठते समय घुटनों और कमर में अकड़न महसूस होना इसी का सामान्य लक्षण है।
बारिश के मौसम में लोग अक्सर घरों के अंदर अधिक समय बिताते हैं और व्यायाम कम कर देते हैं। इससे जोड़ों का प्राकृतिक लचीलापन घटने लगता है और उन्हें सहारा देने वाली मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इसके अलावा धूप कम मिलने से विटामिन-डी की कमी भी हड्डियों और मांसपेशियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून कोई नई बीमारी पैदा नहीं करता, बल्कि पहले से मौजूद समस्याओं को अधिक बढ़ा देता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटॉयड आर्थराइटिस, पुराने फ्रैक्चर, खेल के दौरान लगी चोट या घुटने का प्रत्यारोपण (टोटल नी रिप्लेसमेंट) करा चुके मरीजों को इस मौसम में अधिक परेशानी हो सकती है।
रोजाना 30–40 मिनट हल्की सैर या घर के भीतर व्यायाम करें।
लंबे समय तक एक ही जगह बैठने से बचें।
जोड़ों को ठंडी और नम हवा से सुरक्षित रखें।
कैल्शियम और विटामिन-डी से भरपूर संतुलित आहार लें।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित फिजियोथेरेपी करें।
पर्याप्त पानी पीएं और शरीर को सक्रिय रखें।
यदि जोड़ों के दर्द के साथ सूजन, बुखार या चलने-फिरने में अधिक परेशानी हो रही हो, तो इसे केवल मौसम का असर मानकर नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से सलाह लें। समय पर इलाज से दर्द पर नियंत्रण पाने के साथ-साथ जोड़ों को स्थायी नुकसान से भी बचाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सक्रिय जीवनशैली, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और समय पर उपचार ही मानसून के दौरान हड्डियों और जोड़ों को स्वस्थ रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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