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Sugar Price Hike : चीनी खरीदने पर लगी लिमिट, Blinkit-Swiggy से लेकर D-Mart तक बदले नियम

Simran Mallick / Thu, Aug 27, 2026 / Post views : 2

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Sugar Price Hike: त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। Sugar Price Hike: देश में त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले चीनी की कीमतों में अचानक तेजी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। चीनी की बढ़ती कीमतों और सप्लाई पर दबाव के बीच कई ऑनलाइन और ऑफलाइन रिटेल प्लेटफॉर्म्स ने एक ग्राहक के लिए चीनी खरीदने की सीमा तय कर दी है। इससे Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket, D-Mart और Reliance Retail जैसे प्लेटफॉर्म पर एक बार में सीमित मात्रा में ही चीनी खरीदी जा सकेगी।

उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 26 अगस्त 2026 को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 65.05 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। 26 जुलाई को यही कीमत करीब 48 रुपये प्रति किलो थी। यानी एक महीने में चीनी की कीमत में करीब 35.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

Blinkit-Swiggy से लेकर D-Mart तक खरीदारी की लिमिट

चीनी की कीमतों में तेजी के बीच रिटेलर्स ने जमाखोरी रोकने और सभी ग्राहकों के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खरीदारी की सीमा तय की है।

  • Blinkit: एक बार में अधिकतम 5 किलो चीनी

  • Swiggy Instamart: 1 किलो के 2 पैकेट या 5 किलो का एक पैक

  • BigBasket: अलग-अलग ब्रांड मिलाकर अधिकतम 6 किलो

  • D-Mart/Reliance Retail: प्रति ग्राहक करीब 2 से 3 किलो तक

खरीदारी की वास्तविक सीमा स्टोर, शहर और उपलब्ध स्टॉक के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

थोक बाजार में भी बढ़े चीनी के दाम

चीनी की कीमतों में तेजी केवल खुदरा बाजार तक सीमित नहीं है। थोक बाजार में भी कीमतें करीब 45 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 60.36 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। जुलाई से अगस्त के बीच कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ाई है।

चीनी महंगी होने के पीछे क्या हैं कारण?

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख उत्पादन में संभावित कमी, घरेलू मांग में बढ़ोतरी और कम क्लोजिंग स्टॉक हैं।

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुमान के अनुसार, 2025-26 मार्केटिंग ईयर में एथेनॉल ब्लेंडिंग के बाद देश का चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन रह सकता है। वहीं भारत में सालाना घरेलू खपत करीब 280 लाख टन बताई जाती है।

त्योहारी सीजन में मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ने से सप्लाई पर दबाव और बढ़ सकता है।

त्योहारों में बढ़ सकता है घरेलू बजट का खर्च

रक्षाबंधन के बाद गणेशोत्सव, नवरात्रि और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं। इन दौरान मिठाइयों और चीनी से बने खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ती है। ऐसे में कीमतों में लगातार तेजी का असर आम परिवारों के राशन बजट पर पड़ सकता है।

सरकार ने उठाए ये बड़े कदम

चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने और घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दी है। इसके अलावा चीनी के आयात को टैक्स फ्री करने और 30 सितंबर 2026 तक निर्यात पर रोक जैसे कदम भी उठाए गए हैं।

सरकार ने राज्यों को बाजारों में निगरानी बढ़ाने और जमाखोरी व सट्टेबाजी पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

व्यापारियों के स्टॉक पर भी नजर

चीनी व्यापारियों और डीलरों के लिए भी स्टॉक से जुड़े नियम लागू किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का कारोबार करने वाले डीलर 15 दिन से अधिक की खपत का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। इसके अलावा डीलरों के लिए स्टॉक लिमिट भी निर्धारित की गई है।

फिलहाल सरकार की कोशिश है कि अतिरिक्त आयात, स्टॉक लिमिट और बाजार निगरानी के जरिए चीनी की उपलब्धता बढ़ाई जाए और कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके।

नोट: चीनी की कीमतें और रिटेल प्लेटफॉर्म की खरीद सीमा समय, शहर और उपलब्ध स्टॉक के अनुसार बदल सकती है।

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