Simran Mallick / Tue, Oct 13, 2026 / Post views : 42
धर्म। शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व भक्तिभाव और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष 13 अक्टूबर 2026, मंगलवार को मां चंद्रघंटा की आराधना का दिन बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा साहस, शक्ति और निर्भयता की प्रतीक हैं। उनकी पूजा से भक्त मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास और जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं।
मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप का नाम चंद्रघंटा उनके मस्तक पर सुशोभित घंटे के आकार के अर्धचंद्र के कारण पड़ा है। धार्मिक मान्यताओं और चित्रणों में मां को दस भुजाओं वाली देवी के रूप में दर्शाया जाता है। उनके हाथों में त्रिशूल, तलवार, धनुष, बाण, गदा, कमल और कमंडल सहित विभिन्न अस्त्र-शस्त्र होते हैं। मां सिंह या बाघ पर सवार रहती हैं।
देवी का यह स्वरूप शक्ति, पराक्रम और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का प्रतीक माना जाता है। उनकी अभय मुद्रा भक्तों को निर्भय रहने और कठिन परिस्थितियों का साहस के साथ सामना करने की प्रेरणा देती है।
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करने के लिए भक्त सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर देवी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करके दीपक जलाया जाता है।
पूजा के दौरान मां को फूल, अक्षत, रोली और धूप अर्पित करें। इसके बाद अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार फल, मिठाई या अन्य नैवेद्य का भोग लगाएं। मां चंद्रघंटा का ध्यान करते हुए मंत्र का जाप करें और दुर्गा चालीसा या देवी की आरती का पाठ करें। अंत में परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रार्थना करें।
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना के दौरान इस मंत्र का जाप किया जाता है।
मंत्र:
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप करने से मन को एकाग्र करने और सकारात्मक भाव बनाए रखने में सहायता मिलती है।
धार्मिक मान्यताओं में मां चंद्रघंटा को साहस, शक्ति और निर्भयता प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। भक्त उनकी आराधना करके मानसिक शांति, आत्मविश्वास और जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति की कामना करते हैं।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप यह संदेश देता है कि विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाय धैर्य और साहस के साथ आगे बढ़ना चाहिए। नवरात्रि के तीसरे दिन देवी की पूजा-अर्चना कर भक्त अपने जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मकता की प्रार्थना करते हैं।
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