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Sawan 2026 today : मिट्टी के शिवलिंग की पूजा क्यों मानी जाती है सबसे फलदायी? जानें धार्मिक महत्व, विधि और मान्यताएं

Simran Mallick / Thu, Jul 30, 2026 / Post views : 250

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हिंदू धर्म में सावन (श्रावण) का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे माह में शिवभक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, व्रत और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। इन्हीं में पार्थिव शिवलिंग यानी मिट्टी से बने शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में श्रद्धा और विधि-विधान से पार्थिव शिवलिंग का पूजन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।

पार्थिव शिवलिंग का क्या है महत्व?

'पार्थिव' का अर्थ है पृथ्वी या मिट्टी से निर्मित। यह शिवलिंग जीवन की नश्वरता और भगवान शिव की शाश्वत सत्ता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि मिट्टी से शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करने से व्यक्ति में विनम्रता, श्रद्धा और समर्पण की भावना बढ़ती है।

पौराणिक मान्यता

धार्मिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पहले समुद्र तट पर मिट्टी से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की पूजा की थी। इसके बाद उन्होंने समुद्र पर सेतु निर्माण का कार्य आरंभ किया। इसी कारण पार्थिव शिवलिंग की पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है।

सावन में क्यों की जाती है मिट्टी के शिवलिंग की पूजा?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन में मिट्टी से शिवलिंग बनाकर उसका अभिषेक और पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा के बाद शिवलिंग का जल में विसर्जन किया जाता है, जो यह संदेश देता है कि संसार की हर वस्तु नश्वर है और केवल ईश्वर ही शाश्वत हैं।

पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

  • स्वच्छ और पवित्र मिट्टी से शिवलिंग तैयार करें।

  • शिवलिंग को बेलपत्र या स्वच्छ पूजा स्थान पर स्थापित करें।

  • जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, आक और भस्म आदि अर्पित करें।

  • "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।

  • पूजा पूर्ण होने के बाद पार्थिव शिवलिंग का किसी नदी, तालाब या स्वच्छ जल में विसर्जन करें।

धार्मिक मान्यता

मान्यता है कि सावन में पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा तथा आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है।

Tags :

Shiv Bhagwan

Shradha bhakti

Dharmik Manyata

Puja paath

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